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अनिल अंबानी की कंपनी का 14.37 करोड़ यूरो का कर हुआ था माफ

अनिल अंबानी की कंपनी का 14.37 करोड़ यूरो का कर हुआ था माफ

नई दिल्ली (भाषा)।   14 Apr 2019      Email  

फ्रांस के एक समाचार पत्र में छपी खबर से सामने आई जानकारी
फ्रांस ने 36 राफेल विमानों की खरीद की भारत की घोषणा के बाद अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस कम्युनिकेशन्स की एक अनुषंगी के 14.37 करोड़ यूरो का कर माफ किया था। फ्रांस के एक प्रमुख समाचार पत्र ला मोंदे ने शनिवार को इस खबर का प्रकाशन किया है। अखबार की खबर के मुताबिक रिलायंस कम्युनिकेशन की संबद्धी अनुषंगी कंपनी फ्रांस में पंजीकृत है और दूरसंचार क्षेत्र में काम करती है। रिलायंस कम्युनिकेशन ने इस खबर पर अपनी प्रतिक्रिया में किसी भी तरह के गलत काम से इंकार किया है। कंपनी ने कहा है कि कर विवाद को कानूनी ढांचे के तहत निपटाया गया। 
उन्होंने कहा कि फ्रांस में काम करने वाली सभी कंपनियों के लिए इस तरह का तंत्र उपलब्ध है। फ्रांस के समाचारपत्र ने कहा है कि देश के कर अधिकारियों ने रिलायंस फ्लैग अटलांटिक फ्रांस से 15.1 करोड़ यूरो के कर की मांग की थी लेकिन 73 लाख यूरो में यह मामला सुलट गया। इस समाचार पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि कर मामले और राफेल के मुद्दे में किसी तरह का संबंध स्थापित करना पूरी तरह अनुचित, निहित उद्देश्य से प्रेरित और गलत जानकारी देने की कोशिश है।  मंत्रालय ने यहां एक बयान जारी कर कहा है कि हम ऐसी खबरें देख रहे हैं, जिसमें एक निजी कंपनी को कर में दी गई छूट एवं भारत सरकार द्वारा राफेल लड़ाकू विमान की खरीद के बीच अनुमान के आधार पर संबंध स्थापित किया जा रहा है। कर की अवधि और रियायत के विषय का वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हुई राफेल की खरीद से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में 10 अप्रैल, 2015 को फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के साथ बातचीत के बाद 36 राफेल विमानों की खरीद की घोषणा की थी। कांग्रेस इस सौदे में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाती रही है। विपक्षी दल ने आरोप लगाया है कि सरकार 1,670 करोड़ रुपए की दर से एक विमान खरीद रही है जबकि तत्कालीन संप्रग सरकार ने प्रति विमान 526 करोड़ की दर से सौदा पक्का किया था। कांग्रेस अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस डिफेंस को दसाल्ट एवियशन का ऑफसेट साझीदार बनाने को लेकर भी सरकार पर हमालवर है। सरकार ने आरोपों को खारिज किया है। समाचार पत्र ने कहा कि फ्रांस के अधिकारियों ने रिलायंस फ्लैग अटलांटिक फ्रांस की जांच की और पाया कि 2007-10 के बीच उसे छह करोड़ यूरो का कर देना था। हालांकि मामले को सुलटाने के लिए रिलायंस ने 76 लाख यूरो की पेशकश की लेकिन फ्रांस के अधिकारियों ने राशि स्वीकार करने से इंकार कर दिया। अधिकारियों ने 2010-12 की अवधि के लिए भी जांच की और कर के रूप में 9.1 करोड़ यूरो के भुगतान का निर्देश दिया। अप्रैल, 2015 तक रिलायंस को फ्रांस के अधिकारियों को 15.1 करोड़ यूरो का कर देना था। हालांकि पेरिस में मोदी द्वारा राफेल सौदे की घोषणा के छह महीने बाद फ्रांस अधिकारियों ने अंबानी की कंपनी की 73 लाख यूरो की पेशकश स्वीकार कर ली। रिलायंस कम्युनिकेशन्स के एक प्रवक्ता ने बताया कि कर की मांग पूरी तरह अमान्य और गैर-कानूनी थी। कंपनी ने किसी तरह के पक्षपात या सुलह से किसी तरह के फायदे की बात से इंकार किया। वहीं फ्रांस ने शनिवार को कहा कि वहां के कर प्राधिकरणों तथा रिलायंस की अनुषंगी के बीच कर छूट को लेकर वैश्विक सहमति बनी थी और इसमें किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं किया गया है। फ्रांस के दूतावास ने एक बयान में कहा कि फ्रांस के कर प्राधिकरणों तथा दूरसंचार कंपनी रिलायंस फ्लैग के बीच 2008 से 2018 तक के कर विवाद मामले में वैश्विक सहमति बनी थी। विवाद का समाधान कर प्रशासन की आम प्रक्रिया के तहत विधायी एवं नियामकीय रूपरेखा का पूरी तरह पालन करते हुए निकाला गया था। दूतावास ने कहा कि विवाद का समाधान करने में किसी भी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं किया गया। दूसरी ओर यह खबर सामने आने के बाद कांग्रेस व विपक्षी दलों ने एक बार फिर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मोदी कृपा से फ्रांस की सरकार ने अनिल अंबानी की कंपनी के अरबों रुपए का कर माफ किया। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि फ्रांस के प्रतिष्ठित अखबार ले मोंदे की रिपोर्ट से मनी ट्रेल का खुलासा हो गया है और यह साबित हो गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने राफेल मामले में अनिल अंबानी के बिचौलिए का काम किया है। वहीं माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने लड़ाकू विमान राफेल की खरीद के लिए फ्रांस सरकार के साथ हुए द्विपक्षीय करार मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया है। 


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