नई दिल्ली ... अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस फैलने के चलते युगांडा, दक्षिण सूडान और कांगो से अहमदाबाद आए 11 मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा गया है। अहमदाबाद कॉर्पोरेशन के अधिकारी डॉ. भाविन सोलंकी ने बताया कि प्राथमिक जांच में इनमें से कोई भी संदिग्ध नहीं पाया गया है। लेकिन, एहितायन यह कदम उठाया है।
वहीं, भारत सरकार ने बुधवार को बताया कि देश में इबोला वायरस से जुड़ा एक भी मामला नहीं है। सरकार को यह स्पष्टीकरण इसलिए देना पड़ा क्योंकि युगांडा से भारत आई एक महिला में इबोला जैसे लक्षण देखे गए थे। हालांकि बाद में महिला की रिपोर्ट नेगेटिव आई। महिला 23 मई को बेंगलुरु एयरपोर्ट पहुंची थी। जिसके बाद उसे एहतियातन सरकारी अस्पताल में आइसोलेशन में रखा गया। महिला के शरीर में हल्का दर्द था, हालांकि अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। अफ्रीकी देश कांगो से फैला वायरस युगांडा तक पहुंच गया है। युगांडा में इबोला के 8 मामले सामने आ चुके हैं। पूरी दुनिया में इबोला वायरस डिसीज से पीड़ित मरीजों में 25' से 90' की मौत होती है। इबोला वायरस पहली बार 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। उस समय सूडान और तत्कालीन जायरे (अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) में इसके मामले मिले थे। कांगो में जिस इलाके में यह वायरस मिला, उसके पास बहने वाली इबोला नदी के नाम पर इसका नाम रखा गया। यह जानलेवा बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खून, उल्टी और शरीर के दूसरे तरल पदार्थ के संपर्क से फैलती है। कांगो के पूर्वी इटुरी प्रांत में इबोला से अब तक 80 लोगों की मौत हो चुकी है। 246 संदिग्ध मामले सामने आए हैं।