नई दिल्ली ... मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा। हर गुजरते दिन के साथ हालात और ज्यादा गंभीर होते जा रहे हैं। अब खबर है कि ईरान ने कुवैत स्थित अली अल सलीम एयरबेस को निशाना बनाते हुए बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। इस घटना ने पूरे खाली क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है और आशंका जताई जा रही है कि क्षेत्रीय संघर्ष का दायरा और फैल सकता है।
जानकारी के मुताबिक हमले से कुछ समय पहले ईरान के खोजे स्तान प्रांत के आसमान में बैलस्टिक मिसाइलों की लकीरें देखी गई। इसके बाद कुवैत में मौजूद अली अल सलीम एयरबेस की ओर मिसाइलें बढ़ने की खबर सामने आई। शुरुआती रिपोर्टों में दावा किया गया कि एयरबेस पर तैनात पेट्रियर्ड एयर डिफेंस सिस्टम ने कम से कम एक मिसाइल को हवा में ही रोक लिया। हालांकि हमले से हुए नुकसान और हताहतों को लेकर आधिकारिक जानकारी सीमित है। इस घटनाक्रम के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोशनरी गार्ड कॉप्स यानी कि आईआईजीसी ने कड़ा संदेश दिया। आईआईजीसी का कहना है कि यदि ईरान पर किसी भी प्रकार का हमला किया गया तो उसका जवाब निर्णायक और पहले से कहीं ज्यादा सख्त होगा। यह बयान ऐसे समय में आया जब पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। दरअसल पिछले कई महीनों से मिडिल ईस्ट लगातार तनाव और संघर्ष का केंद्र बना हुआ है।
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ती तनातनी ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। खाली देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी भी इस संघर्ष को और ज्यादा संवेदनशील बना रही है। ईरान लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों का इस्तेमाल उसके खिलाफ किया जा रहा है। जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का कहना है कि उनकी सैन्य मौजूदगी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुवैत स्थित एयरबेस पर हुआ यह हमला केवल एक सैन्य कारवाई नहीं बल्कि एक राजनीतिक और रणनीतिक संदेश भी है। ईरान यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि अगर उसके हितों या उसकी सुरक्षा को चुनौती दी गई तो वह सीधे-सीधे जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा। इस पूरे संघर्ष का असर सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। तेल उत्पादन और समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा बाजार भी प्रभावित हो रहे हैं।