लखनऊ .... इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश में मौजूदा ग्राम प्रधानों को पंचायत चुनाव संपन्न होने और नए प्रधानों के कार्यभार ग्रहण करने तक प्रशासक नियुक्त किए जाने के राज्य सरकार के फैसले पर सवाल उठाया है। कोर्ट ने सरकार से इस मामले में जवाब तलब किया है और 3 जून बुधवार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी. सर्राफ और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने अधिवक्ता ओम प्रकाश प्रजापति द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में राज्य सरकार के 25 मई के आदेश को चुनौती दी गई है। इस आदेश के तहत प्रदेश के वर्तमान ग्राम प्रधानों को पंचायत चुनाव होने तक ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12(3) (क) के अनुसार, ग्राम प्रधान का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तिथि से अधिकतम पांच वर्ष का ही हो सकता है। याचिका में कहा गया है कि समय पर पंचायत चुनाव न कराकर मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासक बनाए रखना उनके कार्यकाल को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ाने के समान है, जो कानून की मंशा के विपरीत है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि पहले जब पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाते थे, तो ग्राम पंचायतों के संचालन के लिए एडीओ पंचायत या अन्य सरकारी अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया जाता था। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इस बार भी किसी सक्षम सरकारी अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया जाना चाहिए, न कि उन ग्राम प्रधानों को जिनका वैधानिक कार्यकाल समाप्त हो चुका है। न्यायालय ने इस मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार से अपना स्पष्ट रुख प्रस्तुत करने को कहा है। इस महत्वपूर्ण मामले पर अब 3 जून को फिर सुनवाई होगी, जब सरकार अपना पक्ष रखेगी।