नई दिल्ली ... अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के लिए तैयार किए गए ड्राफ्ट में न्यूक्लियर प्रोग्राम, ऑयल बैन, फ्रीज प्रॉपर्टी और होर्मुज से जुड़े मुद्दों पर सहमति बन गई है। यह दावा रॉयटर्स न्यूज एजेंसी ने एक सीनियर ईरानी अधिकारी के हवाले से किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक ड्राफ्ट में ईरान ने कहा है कि वह न परमाणु हथियार बनाएगा और न ही किसी दूसरे देश से हासिल करेगा। फाइनल समझौता होने तक ईरान अपने मौजूदा परमाणु कार्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा। वो यूरेनियम एनरिच्ड नहीं करेगा और नए न्यूक्लियर सेंटर्स का विस्तार भी नहीं करेगा। ईरान सभी कारोबारी जहाजों के लिए होर्मुज तुरंत खोल देगा। इसके बदले अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाना शुरू करेगा। अमेरिका कुछ समय के लिए ईरान के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में भी छूट देगा। ड्राफ्ट के मुताबिक, अमेरिका ईरान की 25 अरब डॉलर की जब्त की हुई प्रॉपर्टी जारी करेगा। साथ ही अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर ईरान के रिडेवलपमेंट और विकास की योजना भी तैयार करेगा। अमेरिका के साथ संभावित समझौते को लेकर ईरान में विरोध तेज हो गया है। कट्टरपंथी गुटों, रूढ़िवादी नेताओं और सरकारी मीडिया के कुछ वर्गों का कहना है कि यह समझौता ईरान के लिए झुकने जैसा कदम होगा और इससे युद्ध के दौरान हासिल फायदे कमजोर पड़ जाएंगे। विरोधी गुटों ने रविवार को विदेश मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन की भी तैयारी की है। प्रदर्शनकारियों का मुख्य निशाना विदेश मंत्री और प्रमुख वार्ताकार अब्बास अराघची हैं, जो अमेरिका के साथ बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं। हालांकि ईरान का शीर्ष नेतृत्व फिलहाल एकजुट दिखाई दे रहा है। सुप्रीम लीडर, राष्ट्रपति, विदेश मंत्री, संसद अध्यक्ष और सैन्य नेतृत्व लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिका के साथ बातचीत राष्ट्रीय हित में की जा रही है। अमेरिका के साथ संभावित समझौते को लेकर जारी चर्चाओं के बीच ईरान ने साफ संकेत दिया है कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ईरानी समाचार एजेंसी फार्स के मुताबिक प्रस्तावित समझौता ज्ञापन के राजनीतिक, कानूनी और तकनीकी पहलुओं की समीक्षा जारी है और तेहरान ने अभी तक इस पर अंतिम मंजूरी नहीं दी है। दूसरी तरफ अमेरिकी ट्रम्प समझौते को जल्द अंतिम रूप दिए जाने का दावा कर रहे हैं।