नई दिल्ली .... यूरोपीय देशों में पिछले एक हफ्ते से रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है। इस गर्मी के चलते पूरे महाद्वीप में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और लोगों के दैनिक जीवन पर बुरा असर पड़ा है। साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं।
मौसम वैज्ञानिकों द्वारा यह चेतावनी भी दी गई है कि अगले हफ्ते की शुरुआत से फ्रांस और जर्मनी जैसे देश जहां पिछले कुछ दिनों में गर्मी का सबसे ज्यादा असर देखा गया, वहां गर्मी फिर से बढ़ सकती है।
यूरोप में पिछले एक हफ्ते से जारी रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव (लू) ने अब इटली और बाल्कन देशों को अपनी चपेट में ले लिया है। इटली के उत्तर में बोलजानो से लेकर दक्षिणी द्वीप सिसिली में पलेर्मो तक 22 शहरों में ‘रेड हीट वॉर्निंग’ (भीषण गर्मी की चेतावनी) जारी की गई है।
इस भीषण गर्मी का असर वेटिकन सिटी में भी साफ देखने को मिला, जहां ‘सेंट्स पीटर एंड पॉल’ के त्योहार पर पोप लियो का पारंपरिक ‘एंजेलस’ संदेश सुनने के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी। चिलचिलाती धूप से बचने के लिए वहां मौजूद तीर्थयात्री लगातार पंखों और छतरियों का सहारा लेते दिखाई दिए। वहीं, मौसम विभाग ने क्रोएशिया की राजधानी जगरेब में और पर्यटकों के पसंदीदा शहरों स्पि्लट और डबरोवनिक समेत कई इलाकों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया। स्पि्लट से करीब 55 किलोमीटर दूर एड्रियाटिक सागर में स्थित ‘विस’ द्वीप के चीड़ के जंगलों में भीषण आग लग गई, जिसे बुझाने के लिए दर्जनों दमकलकर्मियों के साथ चार विमानों को तैनात करना पड़ा। वैज्ञानिकों का कहना है कि 20 जून को शुरू हुई यह गर्मी की लहर यूरोप में अब तक की सबसे भीषण गर्मी की लहर है। इस भीषण गर्मी ने बिजली उत्पादन को बाधित किया है, बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है और स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों पर भारी दबाव डाला है। फ्रांस में इस गर्मी की लहर के दौरान 1,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं।