नई दिल्ली .... अयोध्या राम मंदिर में दान की कथित चोरी को लेकर मचे विवाद के बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के वित्तीय मामलों की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि अपनी मेहनत की कमाई आस्था के साथ दान करने वाले लाखों श्रद्धालु चोरी से ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेताओं ने अपने पत्र में कहा कि आप श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हज़ारों करोड़ रुपये की चोरी के बारे में जानते हैं। जिन लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था, भक्ति और भरोसे के साथ अपनी मेहनत की कमाई दान की थी, वे इस चोरी से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर संसद में ट्रस्ट बनाने की घोषणा की थी, लेकिन इसके सदस्य पूरी तरह से उनकी सरकार ने ही नियुक्त किए थे। उन्होंने कहा कि आपने भारत के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर संसद में ट्रस्ट बनाने की घोषणा की थी, लेकिन इसके सदस्य पूरी तरह से आपकी सरकार ने ही नियुक्त किए हैं। यह बात सबको पता है कि ट्रस्ट के सदस्य आरएसएस,वीएचपी और उनसे जुड़े संगठनों से जुड़े हुए हैं। इसके बदनाम पूर्व जनरल सेक्रेटरी भी आपके करीबी सहयोगी थे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी स्वीकार्य नहीं है और उनसे जवाबदेही तय करने और भरपाई सुनिश्चित करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ऐसे अपराध के मामले में आपकी चुप्पी मंज़ूर नहीं है। जवाबदेही तय करना और नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करना आपकी ज़िम्मेदारी है। हम आपसे आग्रह करते हैं कि आप ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की तुरंत एक स्वतंत्र और व्यापक जांच का आदेश दें, जिसमें नकद, सोना और चांदी समेत सभी चढ़ावों के प्रबंधन की जांच भी शामिल हो। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच के नतीजे और ट्रस्ट के हिसाब-किताब को सार्वजनिक किया जाए ताकि हर भक्त को पता चल सके कि उनके चढ़ावे का इस्तेमाल कैसे किया गया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जो भी लोग इसके लिए ज़िम्मेदार पाए जाएं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, चाहे उनका पद या प्रभाव कुछ भी हो।
आपकी सरकार और ट्रस्ट की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी पारदर्शिता और तेज़ी से कार्रवाई करते हैं। भारत की जनता सब देख रही है। जय हिंद! पत्र में लिखा है कि जांच के नतीजे और ट्रस्ट के हिसाब-किताब को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि हर भक्त को पता चल सके कि उनके चढ़ावे का इस्तेमाल कैसे किया गया है।