मुंबई.... बैंक से फाइनेंस पर फोन लेकर कर्ज नहीं चुकाने वालों का फोन अब बैंक लॉक कर सकेंगे। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं जो 01 जनवरी 2027 से लागू होंगे।
केंद्रीय बैंक ने आज बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) तथा वित्तीय सेवा देने वाली अन्य विनियमित इकाइयों के लिए आज ऋण वसूली के संबंध में नियमों में संशोधन जारी किये। इसमें मोबाइल फोन के अलावा टैबलेट और लैपटॉप को भी शामिल किया गया है। इनमें कहा गया है कि कोई भी बैंक, एनबीएफसी या ऋण देने वाली अन्य विनयमित इकाइयां स्वयं या किसी तृतीय-पक्ष सेवा प्रदाता के माध्यम से ऐसी प्रौद्योगिकी-आधारित व्यवस्था का उपयोग तभी कर सकेगी जब उधारकर्ता ने इन उपकरणों की खरीद के लिए उनसे ऋण लिया है।
आरबीआई ने कहा है कि तय तिथि के 30 दिन बाद तक समान मासिक किस्त (ईएमआई) की अदायगी न होने पर ही बैंक मोबाइल, टैबलेट या लैपटॉप के फीचर क्रमिक तरीके से निष्क्रिय करने की कारर्वाई शुरू कर सकते हैं। साथ ही, आउटगोइंग कॉल की सुविधा ऋण अदायगी में चूक के 60 दिन के बाद ही बंद की जा सकेगी। इनकमिंग कॉल, एसएमएस और आपातकालीन सुविधाएं बंद नहीं की जा सकेगी। संशोधित नियमों में यह भी कहा गया है कि लगाये गये प्रतिबंध ऐसे नहीं होने चाहिये जिससे उधारकर्ता अपने कार्य या रोजगार से संबंधित गतिविधियां न कर सके।
उधारकर्ता द्वारा बकाया राशि का भुगतान हो जाने के बाद बैंक को एक घंटे के भीतर सभी प्रतिबंध हटाने होंगे। यदि गलत तरीके से प्रतिबंध लगाये गये हों या भुगतान प्राप्त होने के बाद प्रतिबंध हटाने में देरी हुई हो और उसकी जिम्मेदारी बैंक की हो तो बैंक प्रतिबंध हटाने तक उधारकर्ता को 250 रुपये प्रति घंटा की दर से मुआवजा देगा। हालांकि कुल मुआवजा बैंक द्वारा दी गयी ऋण राशि से अधिक नहीं होगा।
ऋण पूरी तरह चुकता होने के बाद बैंक तुरंत उपकरण पर लगाये गये तकनीकी नियंत्रण को समाप्त करेगा या निष्क्रिय करेगा। यदि उस तकनीकी व्यवस्था को मोबाइल से हटाने का काम उधारकर्ता को करना हो तो बैंक उसे इसकी पूरी प्रक्रिया बतायेगा।
आरबीआई ने कहा है कि उधारकर्ता को किसी भी समय ऋण का आंशिक या पूर्ण पूर्व भुगतान करने का अधिकार होगा। उसने बैंक को मोबाइल उपकरण की कार्यक्षमताओं को अनलॉक करने में होने वाली देरी या अन्य समस्याओं के समाधान के लिए एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करने की भी हिदायत दी है। साथ ही लॉक किये गये उपकरण के व्यक्तिगत डाटा की सुरक्षा की जिम्मेदारी बैंक की होगी। इनमें संपर्क सूची, एसएमएस, कॉल लॉग, फ़ोटो, लोकेशन हिस्ट्री और अन्य व्यक्तिगत जानकारी शामिल है। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा है कि इस डेटा का उपयोग ऋण वसूली या किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता।