नयी दिल्ली .... अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं निर्मित वंदे भारत एक्सप्रेस ने अपने अपनी सर्वोच्च रफ्तार 180 किलो मीटर प्रति घंटे के लक्ष्य को हासिल कर लिया है।
रेलवे की ओर से बुधवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार राजस्थान के कोटा और मध्य प्रदेश के नागदा रेल खंड पर वंदे भारत स्लीपर ट्रेन 180 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी। सोलह कोच वाली इस ट्रेन में आरामदायक सीट, आधुनिक शौचालय, स्वचालित दरवाजे, एडवांस्ड सस्पेंशन (उन्नत निलंबन), सीसीटीवी से निगरानी और वर्ल्ड-क्लास लंबी दूरी की यात्रा के लिए अग्निशमन सुरक्षा प्रणाली जैसी सुविधाएं हैं।
रेलवे ने बताया है कि रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) की देखरेख में स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का अंतिम हाई-स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह ट्रायल कोटा-नागदा सेक्शन पर किया गया। इस दौरान ट्रेन ट्रेन ने 180 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति हासिल की, जो उन्नत और आत्मनिर्भर रेल प्रौद्योगिकी की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
रेलवे ने बताया है कि ट्रायल के दौरान तकनीक का व्यापाक मूल्यांकन किया गया, जिसमें राइड स्थिरता, ऑसिलेशन, कंपन व्यवहार, ब्रेकिंग प्रदर्शन, आपातकालीन ब्रेकिंग सिस्टम, सुरक्षा प्रणालियों और अन्य महत्वपूर्ण मापदंडों का आकलन शामिल था। हाई स्पीड पर ट्रेन का प्रदर्शन पूरी तरह संतोषजनक पाया गया, और सीआरएस ने परीक्षण को सफल घोषित किया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस ट्रेन के हाई-स्पीड ट्रायल का एक वीडियो साझा किया, जिसमें कोटा-नागदा सेक्शन पर 180 किमी प्रति घंटे की गति से वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को दौड़ते हुए दिखाया गया है।
श्री वैष्णव की ओर से साझा किये गये वीडियो में पानी के गिलास की स्थिरता का प्रदर्शन भी दिखाया गया, जिसमें पानी से भरे गिलास हाई स्पीड पर भी बिना गिरे स्थिर रहे, जो इस नई पीढ़ी की ट्रेन की उन्नत राइड गुणवत्ता, बेहतर सस्पेंशन और तकनीकी समक्षता को प्रदर्शित करता है।
रेलवे ने बताया है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को कवच से लैस लिया गया है। इसके साथ ही इसमें क्रैशप्रूफ और झटके-रहित सेमी परमानेंट कपलर और एंटी क्लाइंबर्स लगे हैं। हर कोच के आखिर में फायर बैरियर दरवाजे लगे हैं। आग से बेहतर सुरक्षा के लिए इलेक्ट्रिकल कैबिनेट और टॉयलेट में एयरोसोल आधारित आग का पता लगाने और बुझाने वाली प्रणाली लगाई गई है। वहीं ऊर्जा बचाने के लिए रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम लगाए गए हैं। एयर कंडीशनिंग यूनिट में स्वदेशी रूप से विकसित यूवीड-सी लैंप आधारित कीटाणुशोधन प्रणाली लगायी गयी है। सेंट्रली कंट्रोल्ड ऑटोमैटिक प्लग दरवाजे और पूरी तरह से सील किए गए चौड़े गैंगवे लगे हुए हैं। इसके सभी कोच में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं।
इसके अलावा आपातकालीन स्थिति में यात्री और ट्रेन प्रबंधक/लोको पायलट के बीच बातचीत के लिए इमरजेंसी टॉक-बैक इकाई लगायी गयी है। दिव्यांग यात्रियों के लिए दोनों तरफ ड्राइविंग कोच में एक खास टॉयलेट की व्यवस्था की गयी है। ऊपरी सीट पर आसानी से चढ़ने के लिए एर्गोनॉमिक रूप से डिज़ाइन की गई सीढ़ियां लगायी गयी हैं।