नई दिल्ली ..... कांग्रेस ने गैर-कोयला खनन परियोजनाओं से संबंधित पर्यावरण मंजूरी नियमों में बदलाव को लेकर सरकार की आलोचन की है। पर्यावरण मंत्रालय के हालिया ज्ञापन के अनुसार, गैर-कोयला खनन परियोजना विकासकर्ताओं को पर्यावरण मंजूरी के लिए भूमि अधिग्रहण का प्रमाण प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं होगी। अब तक, मंत्रालय को भूमि अधिग्रहण का प्रमाण चाहिए होता था। कांग्रेस ने कहा कि यह जिम्मेदार पर्यावरण प्रशासन के लिए मोदी सरकार द्वारा एक और झटका है।
कांग्रेस महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा, ‘गैर-कोयला खनन परियोजनाओं के लिए नीति यह रही है कि पहले कानून के अनुसार भूमि अधिग्रहण पूरा किया जाए। उसके बाद ही पर्यावरण संबंधी मंजूरी मांगी जा सकती है। हालांकि, 18 दिसंबर, 2025 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा इस नीति में बदलाव किया गया और अब गैर-कोयला खनन परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले पर्यावरण संबंधी मंजूरी मांगी जा सकती है। ‘ उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि गैर-कोयला खनन परियोजना के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र की पूरी जानकारी के बिना सार्थक पर्यावरणीय प्रभाव आकलन कैसे किया जा सकता है, यह समझना बहुत मुश्किल है। रमेश ने कहा, ‘यह नीतिगत बदलाव देश में जिम्मेदार और जवाबदेह पर्यावरण प्रशासन के लिए मोदी सरकार द्वारा लगाया गया एक और झटका है।’ पूर्व के नियम पर पुनर्विचार किया गया क्योंकि यह अनुरोध किया गया था कि गैर-कोयला खनन परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी (ईसी) प्रदान करते समय भूस्वामियों की सहमति पर जोर नहीं दिया जाना चाहिए और भूमि अधिग्रहण की स्थिति को मंजूरी प्रदान करने से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।