लखनऊ (डीएनएन)। प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना जारी है। पालकी यानी रथ यात्रा रोके जाने के विरोध में शंकराचार्य वहीं धरने पर बैठे हैं, जहां पुलिस उन्हें छोड़ गई थी। वे अपने पंडाल में पूरी रात ठंड में धरने पर बैठे रहे। 25 घंटे से अनाज का एक दाना भी ग्रहण नहीं किया। पानी तक छोड़ दिया।
इस बीच शंकराचार्य ने सोमवार दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा जब तक प्रशासन आकर माफी नहीं मांगता, तब तक हम अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे। फुटपाथ पर ही रहेंगे। उन्होंने कहा शंकराचार्य जब भी इतिहास में स्नान करने गए हैं, पालकी में ही गए हैं। हर साल इसी पालकी में जाते रहे हैं। अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ कहा कि जब तक पुलिस प्रशासन सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ नहीं ले जाएगा, तब तक गंगा स्नान नहीं करूंगा। मैं प्रण लेता हूं कि हर मेले के लिए प्रयागराज आऊंगा, लेकिन कभी भी शिविर में नहीं रहूंगा। फुटपाथ पर ही अपनी व्यवस्था करूंगा। इससे पहले मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने बताया शंकराचार्य ने कल से कुछ भी नहीं खाया है। कोई प्रशासनिक अधिकारी उनसे मिलने भी नहीं आया। सुबह अपनी पूजा और दंड तर्पण उसी स्थान पर किया। निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी रमण पुरी ने कहा हमारे सनातन में शंकराचार्य सर्वोच्च पद होता है। जिस पीठ के हमारे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हैं, वो तो आदि अनंत काल से है। मेले में सबसे ज्यादा सतुआ बाबा फेमस हैं। बस उन्हीं के लिए सारे प्रोटोकॉल लगे हुए हैं। प्रयागराज माघ मेले के दौरान यूपी पुलिस और जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच हुए विवाद का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के पदाधिकारियों ने श्रीराम नाम का कीर्तन कर विरोध दर्ज कराया।