नई दिल्ली.... तेज़ रफ्तार छवियों और पट्टी पर दुनिया के लगातार बदलते दृष्यों के इस दौर में राजधानी में चल रही सोनिका अग्रवाल की कला प्रदर्शनी दर्शकों से थोड़ा ठहरकर आत्मचिंतन करने का एक शांत लेकिन साहसिक आग्रह करती हैं।
पैलेट आर्ट गैलरी में 20 फरवरी तक चलने वाली इस एकल प्रदर्शनी 'जो जाग्रत बना रहता है' इस बात पर केंद्रित है कि देखने की प्रक्रिया में हमारी चेतना कैसे बदलती और सरकती है। मानव मन-मस्तिष्क की विभिन्न अवस्थाओं -जाग्रत (जागना), स्वप्न (सपना), सुषुप्ति (गहरी नींद) और तुरीय (अतींद्रिय चौथा) की प्राचीन भारतीय व्याख्याओं से प्रेरित अपनी प्रदर्शित कृतियों में कलाकार इन अवस्थाओं का प्रत्यक्ष चित्रण करने के बजाय अमूर्तता, निमग्नकारी रंग-क्षेत्रों और समय के साथ खुलने वाले स्थानिक अनुभवों के माध्यम से इनकी अनुभूति कराने का प्रयास करती हैं।
अपनी पेंटिंग, मूर्तिकला और इंस्टॉलेशन के माध्यम से काम करते हुए अग्रवाल कैनवास की पारंपरिक सीमाओं को पीछे छोड़ ऐसे परिवेश का सृजन कर जाती हैं जिसमें उनकी कला जीवित, सांस लेते और प्रतिक्रिया करती प्रतीत होती है।
इस प्रदर्शनी का क्यूरेशन मायना मुखर्जी ने किया है। यहाँ अमूर्त कला सौंदर्यात्मक दूरी नहीं, बल्कि आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करने वाली भाषा बन जाती है जहां प्रदर्शन का प्रतिरोध और अंतर्मुखता को प्राथमिकता है। प्रदर्शित कृतियाँ दर्शकों से उपस्थिति की मांग करती हैं, उन्हें ठहरने को कहती हैं।
राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित और सत्रह वर्षों से अधिक के अनुभव वाली, स्वशिक्षित कलाकार सोनिका देश-विदेश में व्यापक रूप से अपनी कला को प्रदर्शित कर चुकी हैं। हाल ही में उनका कार्य 'म्यूज़ियम ऑफ़ सेक्रेड आर्ट्स (पावन कलाओं का संगीत) बेल्जियम के संग्रह में शामिल किया गया है।