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नहीं रहे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली

नहीं रहे पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली

नई दिल्ली (भाषा)।   25 Aug 2019      Email  

जेटली का आज दिल्ली के निगमबोध घाट पर होगा अंतिम संस्कार, राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति सहित कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

वित्त मंत्री के तौर पर भारत में सबसे बड़ा कर सुधार करने तथा भाजपा एवं मोदी सरकार के मुख्य संकटमोचक के रूप में प्रख्यात रहे अरुण जेटली का शनिवार को यहां एम्स में 66 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। पिछले कई महीने से उनका स्वास्थ्य खराब चल रहा था। अस्पताल ने संक्षिप्त बयान में कहा कि जेटली ने दोपहर 12 बजकर सात मिनट पर अंतिम सांस ली। सांस लेने में परेशानी आने की वजह से नौ अगस्त को उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका अंतिम संस्कार रविवार दोपहर को निगमबोध घाट पर होगा। जेटली को भाजपा का सदाबहार नेता माना जाता था जिन्हें किसी भी मुद्दे पर आम सहमति बनाने में महारत थी। नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में वह मुख्य रणनीतिकार थे। वह वित्त, रक्षा, कॉरपोरेट मामले और सूचना तथा प्रसारण मंत्री रहे। विभिन्न दलों के नेताओं ने जेटली को श्रद्धांजलि दी। उन्हें कभी भी कट्टर हिंदुत्व से जुड़ा नेता नहीं माना गया। उन्होंने नरेंद्र मोदी को भाजपा में उभरने में सहयोग किया जिससे वह प्रधानमंत्री के विश्वस्त मित्र बने। भाजपा के मई 2014 में सत्ता में आने के बाद जेटली ने मोदी के विभिन्न महत्वाकांक्षी योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका सबसे महत्वपूर्ण कार्य 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करना था जो स्वतंत्रता के बाद सबसे बड़ा कर सुधार था। दो बार संक्षिप्त समय के लिए रक्षा मंत्री रहते हुए जेटली ने सशस्त्र बलों में काफी समय से लंबित सुधारों को लागू किया और कई महत्वपूर्ण पहल को लागू किया ताकि रक्षा उत्पादन में भारत आत्मनिर्भर बन सके। वह भाजपा के उन दिग्गज नेताओं में थे जिन्होंने पार्टी को अटल-आडवाणी युग से सुचारू रूप से निकालकर नरेंद्र मोदी के हाथों में सौंपा जिससे नई पीढ़ी के नेताओं का उदय हुआ। छह अगस्त को सुषमा स्वराज के बाद उनका निधन भाजपा के लिए एक बड़ा झटका है। पार्टी नेताओं ने जेटली के निधन पर शोक जताया और उन्हें प्रिय साथी, मार्गदर्शक और गाइड के रूप में याद किया तथा पार्टी तथा देश के विकास में उनके योगदान की प्रशंसा की। उनके दोस्तों में राजनीति से लेकर पत्रकारिता, बॉलीवुड और खेल की दुनिया तक के लोग शामिल थे। जेटली वह पुल थे जिनके माध्यम से भाजपा अपने नए सहयोगियों से जुड़ती थी और महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्षी नेताओं को अपने साथ लाती थी। 
जद (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई दशकों तक उनके निजी दोस्त रहे। अपने शोक संदेश में लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि जेटली को उनकी तीक्ष्ण और विश्लेषणात्मक बुद्धि के लिए सम्मान प्राप्त था और जटिल मुद्दों का समाधान हासिल करने के लिए भाजपा में हर कोई उन पर निर्भर था। जेटली का पिछले वर्ष 14 मई को एम्स में गुर्दा प्रतिरोपण हुआ था और इसके बाद उनका स्वास्थ्य धीरे-धीरे खराब होने लगा जिससे वह अपने कार्य से अक्सर छुट्टियां लेने लगे। उनको उत्तक कैंसर भी था। मोदी के नेतृत्व में इस वर्ष मई में भगवा दल की भारी जीत के बावजूद दूसरे कार्यकाल में वह सरकार में शामिल नहीं हुए। लोकसभा चुनाव 2014 में अमृतसर संसदीय सीटा से हारने के बाद जेटली स्वास्थ्य कारणों से 2019 के लोकसभा चुनावों में उम्मीदवार नहीं बने। वर्ष 2000 में राज्यसभा में आने के बाद वह लगातार चौथी बार उच्च सदन के सदस्य थे जहां वह विपक्ष के नेता थे और 2014 में भाजपा के सत्ता में आने के बाद वह सदन के नेता बने। निधन के बाद जेटली का पार्थिव शरीर राष्ट्रीय राजधानी के कैलाश कालोनी स्थित उनके आवास पर ले जाया गया जहां राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित विभिन्न नेताओं ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, हर्षवर्धन, जितेंद्र सिंह और एस. जयशंकर के अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित विभिन्न नेताओं ने जेटली को श्रद्धांजलि दी। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजीव शुक्ला के अलावा केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान तथा उनके पुत्र चिराग पासवान ने भी दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अरविंद केजरीवाल, नवीन पटनायक, कमलनाथ समेत विभिन्न मुख्यमंत्रियों ने उनके आवास पर जा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। जेटली के निधन के बाद योगी ने अपना मथुरा दौरा रद्द कर दिया। मुख्यमंत्री को शनिवार को मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आयोजन में शामिल होना था और उन्हें वृंदावन में निर्मित पर्यटक सुविधा केंद्र का उद्घाटन भी करना था। शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर ने भी दिवंगत पूर्व केंद्रीय मंत्री के आवास जा कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।  पूर्व वित्त मंत्री को श्रद्धा सुमन अर्पित करने वालों में पूर्वी दिल्ली के सांसद गौतम गंभीर, राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़, मीनाक्षी लेखी, अनुराग ठाकुर , प्रवेश साहिब सिंह वर्मा व विजय गोयल शामिल रहे। वाम दलों ने भी जेटली के निधन पर गहरा दुख जताया है।  अंतिम यात्रा से पहले रविवार की सुबह उनके पार्थिव शरीर को भाजपा मुख्यालय ले जाया जाएगा। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जेटली के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि जेटली का एक सार्वजनिक व्यक्तित्व था और उन्होंने संसद सदस्य और मंत्री के रूप में लंबे समय तक सेवा की। सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि गरीबों के कल्याण और विश्व की सबसे तेज अर्थव्यवस्थाओं में भारत को शुमार करने के लिए प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को लागू करने में उन्होंने अमिट छाप छोड़ी है।  उन्होंने कहा कि पूर्व वित्त मंत्री का निधन राष्ट्र, सरकार और भाजपा के लिए बड़ा नुकसान है। दूसरी ओर अमेरिका, फ्रांस, चीन व यूरोपीय संघ समेत कई देशों के शीर्ष राजनयिकों ने जेटली के निधन पर दुख जताते हुए उन्हें बेहतर राजनीतिज्ञ करार दिया। वहीं हरियाणा सरकार ने अरुण जेटली के सम्मान में दो दिवसीय राजकीय शोक मनाने का फैसला किया है। 



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