नयी दिल्ली.... विश्व पुस्तक मेला के छठवें दिन गुरुवार को थीम पवेलियन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने प्रसिद्ध लेखक एवं चिंतक तरुण विजय की पुस्तक 'मंत्र विप्लव' का लोकार्पण किया।
इस अवसर पर भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) के निदेशक युवराज मलिक के साथ साहित्य, विचार और राष्ट्रबोध से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में चल रहे पुस्तक मेले में विमोचन समारोह में श्री होसबाले ने महान विचारक महर्षि अरविंद को स्मरण करते हुए उनके द्वारा प्रतिपादित तीन महत्वपूर्ण विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहला, हमें अपने देश के प्राचीन ज्ञान और बौद्धिक परंपरा को एकत्रित और समझना चाहिए। दूसरा, उस ज्ञान को केवल ग्रंथों तक सीमित न रखते हुए जीवन उपयोगी और मानव कल्याण से जोड़ना चाहिए। तीसरा, समाज को आगे बढ़ाने के लिए नवीनतम ज्ञान की सतत खोज करते रहना आवश्यक है।
श्री होसबाले ने कहा कि तरुण विजय की पुस्तक 'मंत्र विप्लव' इन्हीं विचारों की दिशा में एक गंभीर बौद्धिक प्रयास है, जो भारत की वैचारिक परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और समकालीन संदर्भों को जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि ज्ञान कर्म और उपासना की त्रिवेणी से देश का कल्याण सम्भव है।
श्री होसबाले ने कहा कि किसी को शस्त्र से मारने से शरीर का नाश होता है जबकि ज्ञान यानी प्रज्ञा से शत्रु पूरी तरह से नष्ट होता है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान का भंडार हमारी संस्कृति और सभ्यता है यही उसका आधार भी है। उन्होंने कहा कि हमें ज्ञान आधारित समाज बनाना है जिसमे स्वार्थ और पूर्वाग्रह नही होना चाहिए।
भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि 'मंत्र विप्लव' केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि विचारों का ऐसा प्रवाह है जो भारतीय चिंतन की गहराई को वर्तमान समय की चुनौतियों से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ऐसे साहित्य की आवश्यकता है, जो समाज को आत्मबोध, आत्मविश्वास और वैचारिक स्पष्टता प्रदान करे।
पुस्तक के लेखक तरुण विजय ने पाठकों और अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 'मंत्र विप्लव' भारतीय ज्ञान परंपरा, राष्ट्रचिंतन और सांस्कृतिक आत्मसम्मान की यात्रा का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक पाठकों को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि सोचने और विमर्श करने के लिए प्रेरित करेगी।