लखनऊ (डीएनएन)। यूपी के अनुदेशक शिक्षकों को 17000 हजार रुपए मानदेय का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की वह अपील खारिज कर दी है, जिसमें यूपी सरकार अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने के खिलाफ थी। साथ ही यह आदेश दिया है कि अनुदेशकों की नौकरी खत्म न की जाए।
सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने साफ कहा है कि संविदा की निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद भी अनुदेशकों की नौकरी खत्म नहीं होगी। 10 साल से लगातार काम करने की वजह से यह पद ऑटोमैटिक तरीके से सृजित है। अनुदेशकों को 17 हजार रुपए मानदेय 2017 से लागू किया जाए। दरअसल, अनुदेशक 2013 से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे। इनकी याचिका पर हाईकोर्ट ने मानदेय बढ़ाने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने कहा संविदा की निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद भी अनुदेशकों की नियुक्ति खत्म नहीं होगी। यह पोस्ट कांट्रैक्चुअल भी नहीं माना जा सकता क्योंकि इनके कांट्रैक्ट में यह साफ तौर पर मेंशन है कि वे अपने स्पेयर टाइम में दूसरी नौकरी या काम नहीं कर सकते। ऐसे में यह स्पष्ट है कि ये इंट्रक्टर टीचर 10 साल से लगातार काम कर रहे हैं और परमानेंट टीचर के रूप में डीम्ड तौर पर एम्लायड हैं। इतना समय बीतने और उनके लगातार काम करने की वजह से यह पद ऑटोमेटिकली सृजित हो गया है। 17 हजार रुपए से कम मानदेय संविधान के आर्टिकल-23 के विपरीत है। कोर्ट में मंगलवार को करीब तीन घंटे तक सुनवाई हुई। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की डबल बेंच ने राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं को तीन दिन के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट की टिप्पणियों से अनुदेशकों के पक्ष में माहौल बनता नजर आया।
2017 से लागू होगा बढ़ा हुआ मानदेय : अनुदेशकों के विधिक सलाहकार बृजेश कुमार त्रिपाठी ने कहा है कि यह अनुदेशकों की बड़ी जीत है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अनुदेशकों के साथ न्याय हुआ है। उन्हें 2017 से बढ़ा हुआ मानदेय मिलेगा। बृजेश इस पूरे मामले में अनुदेशकों को विधिक सलाह देते हैं। वह मूलरूप से अमेठी के रहने वाले हैं।
6 महीने में बकाया चुकाने का आदेश : डबल बेंच ने आदेश दिया कि संशोधित मानदेय का भुगतान 1 अप्रैल 2026 से शुरू किया जाए। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि अंशकालिक शिक्षकों का पूरा बकाया आज यानी 4 फरवरी 2026 से छह महीने की अवधि के भीतर अनिवार्य रूप से भुगतान किया जाए।
2 साल बाद सुप्रीम कोर्ट में पूरी हुई बहस : करीब 2 साल के अंतराल के बाद सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पूरी हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता सखाराम यादव, पीएस पटवालिया और दुर्गा तिवारी ने अनुदेशकों की ओर से मजबूत पक्ष रखा। मुख्य याचिकाकर्ता आशुतोष शुक्ला, राकेश पटेल सहित अन्य याची भी सुनवाई के दौरान मौजूद रहे। अनुदेशकों के विधिक सलाहकार बृजेश त्रिपाठी ने बताया कि अनुदेशकों की 8-9 साल की लड़ाई सार्थक रही।