नयी दिल्ली..... प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दिल्ली कार्यालय ने बुधवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 10,021.46 करोड़ रुपये की 247 अचल संपत्तियां जब्त कर ली हैं।
ये संपत्तियां मुख्य रूप से मोहाली, सास नगर, रूपनगर और जीरकपुर में स्थित हैं। यह कार्रवाई पीएसीएल लिमिटेड और उससे जुड़ी संस्थाओं के किये बड़े वित्तीय घोटाले की जांच का हिस्सा है।
ईडी ने यह जांच उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई के दर्ज प्राथमिकी के आधार पर की है। सीबीआई ने इस अवैध निवेश योजना को चलाने के मामले में 33 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इस सूची में कई व्यक्ति और कंपनियां शामिल हैं।
आरोप पत्र के अनुसार, इन लोगों ने पूरे भारत में लाखों निवेशकों से 48,000 करोड़ रुपये से अधिक की भारी राशि जुटायी। यह पैसा कृषि भूमि की बिक्री और विकास के बहाने धोखाधड़ी से लिया गया था। निवेशकों को नकद भुगतान और किस्तों वाली योजनाओं का लालच दिया गया। उनसे समझौतों और मुख्तारनामा जैसे भ्रामक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कराये गये। अधिकतर मामलों में निवेशकों को कभी जमीन नहीं दी गयी।
आज भी निवेशकों का करीब 48,000 करोड़ रुपये बकाया हैं। इस पूरी धोखाधड़ी को छिपाने के लिए फर्जी संस्थाओं और गलत लेन-देन की एक शृंखला तैयार की गयी थी।
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उच्चतम न्यायालय ने सेबी को एक विशेष समिति बनाने का निर्देश दिया। पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया। समिति का काम पीएसीएल की खरीदी जमीन को बेचना और उससे मिले पैसे निवेशकों को वापस करना था। बाद की जांच में हालांकि पता चला कि पीएसीएल की संपत्तियों का अवैध रूप से नुकसान पहुंचाना जारी रहा। इसके बाद पंजाब सतर्कता ब्यूरो, जयपुर और बेंगलुरु पुलिस ने तीन और प्राथमिकी दर्ज कीं। इनमें निवेशकों के पैसे से खरीदी जमीन की अवैध बिक्री, अतिक्रमण और दुरुपयोग के आरोप लगाये गये।
इन मामलों में की गयी छापेमारी के दौरान कई फर्जी दस्तावेज बरामद हुए। इनमें खाली सेल डीड, हस्ताक्षरित चेक बुक और पहचान पत्र शामिल थे। इससे पता चलता है कि अपराध की कमाई को हड़पने और ठिकाने लगाने की व्यवस्थित कोशिश की गयी थी। प्रवर्तन निदेशालय ने 2016 में यह मामला दर्ज किया था। इसके बाद 2018 में पहली शिकायत दर्ज की गयी। फिर 2022, 2025 और 2026 में धन शोधन मामले में शामिल आरोपियों के खिलाफ तीन और शिकायतें दर्ज की गयीं। विशेष अदालत (पीएमएलए) ने अब तक की सभी शिकायतों पर संज्ञान लिया है।
जब्त की गयी 247 संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है। ये सभी संपत्तियां निवेशकों के पैसे से खरीदी गयी थीं। ताजा कार्रवाई के साथ ईडी अब तक करीब 17,610 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां जब्त कर चुका है। इनमें भारत और विदेश में स्थित संपत्तियां भी शामिल हैं।