नई दिल्ली .... भारत के शीर्ष प्रकाशक समूहों की डिजिटल इकाइयों के संगठन डीएनपीए द्वारा डीएनपीए कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन गुरुवार को किया गया। डिजिटल मीडिया के दौर में समाचार माध्यमों की भूमिका कैसी हो? इस विषय पर यहां विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पूरी दुनिया के मीडिया जगत के लिए यह महत्वपूर्ण दौर है। यह सही निर्णय लेने का समय है। यह जरूरी है कि आम सहमति बने, अच्छे विकल्प सामने आएं और अच्छी सिफारिशें मिलें ताकि भविष्य की नीतियों को आकार दिया जा सके।
बदलते दौर में समाचार माध्यमों की भूमिका पर केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि पूरा मानव समाज भरोसे की संस्थाओं पर टिका है। यह भरोसा परिवार से शुरू होता है और सामाजिक पहचान, न्यायपालिका, मीडिया, विधायिका जैसी संस्थाओं तक जाता है। समाज के अलग-अलग अंग और संस्थाएं विश्वास के सिद्धांत पर काम करती हैं। मीडिया घरानों के लिए भी बुनियादी सिद्धांत यही रहता है कि वह निष्पक्ष और जिम्मेदार रहें। मीडिया के समक्ष खतरे भी मौजूद हैं। जैसे- डीप फेक, गलत सूचनाओं का प्रवाह। हर समाज इस तरह के खतरों से जूझ रहा है। जो संस्थाएं शताब्दियों से मौजूद हैं, उन्हें इन खतरों से कैसे बचाए रखा जाए, यह बड़ी चुनौती है। ऑनलाइन सेफ्टी इसके लिए बहुत जरूरी है। खबरों की प्रामाणिकता, बच्चों की सुरक्षा, सिंथेटिक कंटेंट से बचाव भी जरूरी है और इसके लिए निर्णायक कदम उठाने की जरूरत है। वैष्णव ने कहा कि उदाहरण के लिए होटल में आने वाले ग्राहक का होटल प्रबंधन सत्यापन करता है, उसी तरह ऑनलाइन मंचों को भी सत्यापन का ध्यान रखना होगा ताकि कंटेंट का इस्तेमाल करने वालों को किसी तरह का नुकसान न हो। कंटेंट किस तरह वायरल हो जाता है, यह हम सभी जानते हैं। कुछ घंटों में वायरल कंटेंट लोगों तक पहुंच जाता है। ऐसे में जिम्मेदारी रखना बहुत जरूरी है। नागरिकों को खतरों से बचाना, उनकी ऑनलाइन सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संसदीय समितियां और न्यायपालिका भी लोगों के सामने मौजूद खतरों को लेकर चिंतित हैं। अगर किसी यूजर की कोई शिकायत है, तो उसे कैसे सुना जाए और उनकी हिफाजत करने का तंत्र क्या होगा, इस पर चर्चा जरूरी है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के व्यावसायिक मॉडल पर बात करते हुए उन्होंने जोर दिया कि खबरों के रचनाकारों, परंपरागत मीडिया, इन्फ्लुएंसर्स और शोधार्थियों के साथ रेवेन्यू निष्पक्ष तरीके से साझा किया जाना चाहिए। इसके लिए नीतिगत ढांचे की आवश्यकता जताते हुए और टेक कंपनियों को आगाह करते हुए वैष्णव ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘मैं सभी प्लेटफॉर्म्स से अपनी रेवेन्यू-शेयरिंग नीतियों पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करूंगा क्योंकि यह आज पूरे समाज की एक प्रमुख चिंता है। यदि यह स्वेच्छा से नहीं किया जाता है, तो ऐसे कई देश हैं जिन्होंने इसे कानूनी तरीके से करने का रास्ता दिखाया है।’ इसके लिए नीति बनाना जरूरी है। जिनके पास कॉपीराइट है, जिनके पास मौलिक कंटेंट है, वह उनकी बौद्धिक संपदा है, जिसका सम्मान होना चाहिए। बौद्धिक संपदा का सम्मान नहीं होगा, तो समाज का विकास भी नहीं हो सकेगा।