नई दिल्ली (एजेंसी)। बड़े बैंकिंग घोटाले के आरोपों में फंसे अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। कोर्ट ने सीबीआई और ईडी की जांच में दिखाई गई अनिच्छा पर नाराजगी जताते हुए साफ कहा कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी होनी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि इतने बड़े मामले में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सच्चाई सामने आनी ही चाहिए।सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि जांच एजेंसियों का रवैया भरोसा पैदा करने वाला होना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि एसआईटी का गठन किया गया है। इसमें ईडी के वरिष्ठ अधिकारी और बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हैं। अब तक करीब 15,000 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कोर्ट ने सभी वित्तीय संस्थानों को ईडी को पूरा सहयोग देने का निर्देश भी दिया। यह मामला एडीएजी कंपनियों द्वारा कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड से जुड़ा है। कोर्ट में बताया गया कि कुल कथित घोटाला करीब 73,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं एक मामले में 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज सिर्फ 26 करोड़ रुपये देकर निपटाने की बात सामने आई है। इससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि स्श्वख्ढ्ढ रिपोर्ट में साफ संकेत हैं कि पैसे को व्यवस्थित तरीके से इधर-उधर किया गया, लेकिन ष्टख्ढ्ढ ने अब तक कोई बड़ी गिरफ्तारी नहीं की। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह यह निर्देश नहीं दे सकता कि किसे गिरफ्तार किया जाए, लेकिन जांच में सुस्ती स्वीकार नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि जांच का परिणाम ऐसा होना चाहिए जिससे लोगों का भरोसा बने। ईडी और सीबीआई फिलहाल कई स्नढ्ढक्र की जांच कर रहे हैं। ईडी ने बताया कि रिलायंस होम फाइनेंस में 7,500 करोड़ रुपये और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस में 8,200 करोड़ रुपये के डिफॉल्ट के मामले सामने आए हैं। वहीं रिलायंस पावर के मामले में फर्जी बैंक गारंटी देने से 105 करोड़ रुपये का नुकसान होने की बात भी जांच में सामने आई है। जांच एजेंसियों ने अब तक कई अहम दस्तावेज और जानकारी जुटाई है।