बेंगलुरु.... दो साल पहले बेंगलुरु में ही लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) के तेज गेंदबाज मयंक यादव ने अपनी तेज़ रफ़्तार और आक्रामक गेंदबाज़ी को दुनिया के सामने पहली बार पेश किया था। स्पीड गन 156.7 kph तक पहुंची थी और मयंक ने एक के बाद एक कई बल्लेबाज़ों को परेशानी में डाला था। भारतीय क्रिकेट टीम ने भी उन पर तुरंत ध्यान दिया और कुछ महीनों बाद उन्हें अंतरराष्ट्रीय डेब्यू भी मिल गया।
तब से मयंक का सफ़र बिल्कुल भी आसान नहीं रहा है। चोट और लंबा रिहैब उन्हें एक साल से ज़्यादा समय तक बाहर रखे रही। अब अपने वर्कलोड को सावधानी से बढ़ाने के बाद, वह आईपीएल 2026 में पहली बार फिर से खेलने के लिए तैयार हैं।
आरसीबी के ख़िलाफ़ एलएसजी के मैच से पहले, मयंक ने एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में कुछ समय स्पॉट बॉलिंग की, फिर गेंदबाज़ी कोच बी अरुण के साथ लंबी बातचीत की। इसके बाद उन्होंने छोटा लेकिन तेज स्पेल डाला, जिसमें उनकी रफ़्तार साफ़ दिख रही थी। इसके बाद उन्होंने हल्की एक्सरसाइज़, स्ट्रेच और मोबिलिटी ड्रिल्स कीं और फिर चेंज रूम लौट गए।
एलएसजी के ग्लोबल डायरेक्टर ऑफ क्रिकेट टॉम मूडी ने सीजन की शुरुआत में मयंक के न खेलने की वजह बताई और कहा कि इसका कारण फ़िटनेस नहीं, बल्कि मैच के लिए तैयार नहीं होना था। उन्होंने कहा, "मयंक अब खेलने के लिए तैयार हैं। टूर्नामेंट की शुरुआत में हमने उन्हें टीम में नहीं रखा क्योंकि वह अभी पूरी तरह तैयार नहीं थे। फ़िटनेस के लिहाज से नहीं बल्कि उनकी फिटनेस अच्छी थी। लेकिन गेंदबाज़ी लोड और क्रीज पर सहज महसूस करने के मामले में वह थोड़ा पीछे थे।
"अब हमें लगता है कि वह उस स्तर पर पहुंच गए हैं। उन्होंने बहुत मेहनत की है। लेकिन इससे हमारे सामने चयन की समस्या भी खड़ी हो जाती है क्योंकि अब तक हमारी गेंदबाज़ी काफ़ी मजबूत रही है। बस हमें रन नहीं मिल पाए जो गेंदबाज़ों को सपोर्ट कर सकें।"
अगर मयंक खेलते हैं, तो इसकी क़ीमत आवेश खान को चुकानी पड़ सकती है, जो एक और तेज गेंदबाज हैं और चोट से वापसी कर रहे हैं। 'टीम ने उन्हें सीज़न से पहले एसए 20 में डरबन सुपर जायंट्स के साथ अभ्यास का मौक़ा दिया था ताकि वह अपना वर्कलोड बढ़ा सकें। हालांकि अब तक उन्होंने 10.40 रन प्रति ओवर दिए हैं, लेकिन उनका अनुभव टीम के लिए अलग-अलग समय पर काम आ सकता है।
मूडी ने कहा, "मयंक, मोहसिन खान और आवेश सभी लंबे समय तक चोट से जूझते रहे हैं। हमारी मेडिकल टीम ने उन्हें तैयार करने के लिए बहुत मेहनत की है। अब ये सभी उपलब्ध हैं। मोहसिन का शायद मैच के दिन आख़िरी टेस्ट होगा।" लगातार दो सीजन प्लेऑफ़ में जगह बनाने में नाकाम रहने के बावजूद एलएसजी की एक बड़ी सफलता नई प्रतिभाओं को सामने लाना है। 2024 में मयंक सामने आए, 2025 में दिग्वेश राठी।
इस साल बारी मुकुल की है। कोलकाता नाइट राइडर्स के ख़िलाफ़ सिर्फ़ अपनी तीसरी पारी में 27 गेंदों पर नाबाद 54 रन बनाकर वह सुर्खियों में आ गए। आख़िरी से पहले गेंद पर छक्का लगाकर स्कोर बराबर करना और फिर भागकर एक रन लेकर मैच जिताना, कुछ ही मिनटों में वह स्टार बन गए।
हालांकि, मूडी इस तरह की अचानक मिली पहचान के असर को लेकर सतर्क हैं, लेकिन उन्हें भरोसा है कि मुकुल इसे संभाल लेंगे। उन्होंने कहा, "यह किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए एक जाल होता है। मुकुल को टीम के अंदर बहुत अच्छा सपोर्ट मिला है। टीम का माहौल भी बहुत संतुलित है। यहां उनका अच्छे से ध्यान रखा जाएगा। हम जानते हैं कि एक या दो अच्छी पारियों के बाद किसी भी खिलाड़ी के लिए चीज़ें तेज़ी से बदल सकती हैं।
"मीडिया और लोगों की नजर में चीज़ें बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जाती हैं। लेकिन वह एक बहुत ही विनम्र और ज़मीन से जुड़े हुए युवा हैं। उनकी शानदार पारी के बाद भी उनका व्यवहार यही दिखाता है। वह शांत हैं, समझदारी से काम ले रहे हैं और लगातार मेहनत कर रहे हैं, जो बहुत अच्छे संकेत हैं। इससे उनके बारे में बहुत कुछ पता चलता है। हमें पूरा भरोसा है कि वह इसी रास्ते पर बने रहेंगे।"