नयी दिल्ली... उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि वह नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 और नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 को चुनौती देने वाली लगभग 240 याचिकाओं पर 05 मई से अंतिम सुनवाई शुरू करेगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के लिए 05 मई से 12 मई तक कुल आठ दिन निर्धारित किए हैं। मामलों को दो समूहों में बांटा गया है-एक असम और त्रिपुरा से संबंधित तथा दूसरा देश के बाकी हिस्सों से जुड़ा।
पीठ ने कहा, "सीएए 2019 को चुनौती देने वाले दो सेट के मामले हैं…," और नोडल वकीलों को मामलों की पहचान कर अलग-अलग सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। अदालत ने संकेत दिया कि पहले याचिकाकर्ताओं को सुना जाएगा, उसके बाद केंद्र सरकार अपनी दलीलें रखेगी और 12 मई को प्रत्युत्तर बहस के साथ सुनवाई पूरी होगी।
नागरिकता (संशोधन) अधि, 2019 को संसद ने 11 दिसंबर 2019 को पारित किया था और अगले दिन राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी। इसके तुरंत बाद आईयूएमएल ने इसकी संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। समय के साथ राजनीतिक नेताओं, नागरिक समाज समूहों और अन्य व्यक्तियों की ओर से सैकड़ों याचिकाएं दायर की गईं।
यह अधिनियम नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन कर धारा 2(1)(बी) में प्रावधान जोड़ता है, जिसके तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को "अवैध प्रवासी" नहीं माना जाएगा। इससे उन्हें भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का अधिकार मिलता है। इस प्रावधान में मुस्लिम समुदाय को शामिल नहीं किया गया है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह कानून नागरिकता के लिए धर्म को आधार बनाकर संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है और संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना को कमजोर करता है। अठारह दिसंबर 2019 को शीर्ष न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था, लेकिन उस समय नियम अधिसूचित नहीं होने के कारण कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
मार्च 2024 में केंद्र सरकार ने नागरिकता (संशोधन) रुल्स, 2024 अधिसूचित कर कानून को लागू किया। इसके बाद अधिनियम और नियमों दोनों पर रोक लगाने की मांग करते हुए नई याचिकाएं दायर की गईं। अदालत ने केंद्र से जवाब मांगा, लेकिन अंतरिम रोक देने से इनकार कर दिया।
याचिकाकर्ताओं में सांसद जयराम रमेश, महुआ मोइत्रा और असदुद्दीन ओवैसी सहित आईयूएमएल और असम गण परिषद जैसी राजनीतिक पार्टियां तथा अन्य संगठन शामिल हैं।