लखनऊ से हिंदी एवं उर्दू में एकसाथ प्रकाशित राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र
ताजा समाचार

समाचार विवरण

डेली न्यूज़ एक्टिविस्ट

मीडिया हाउस, 16/3 'घ', सरोजिनी नायडू मार्ग, लखनऊ - 226001
फ़ोन : 91-522-2239969 / 2238436 / 40,
फैक्स : 91-522-2239967/2239968
ईमेल : dailynewslko@gmail.com
ई-पेपर : http://www.dailynewsactivist.com

रोजगार के अवसर बढ़ाएं, मुफ्तखोरी नहीं
रोजगार के अवसर बढ़ाएं, मुफ्तखोरी नहीं
एजेंसी    19 Feb 2026       Email   

नई दिल्ली .... सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। दरअसल, राज्य सरकार ने कुछ समुदायों के लिए बिजली टैरिफ में सब्सिडी स्कीम की घोषणा की थी। इससे पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी पर फाइनेंशियल दबाव पड़ा। राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ पावर डिस्टि्रब्यूशन कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि राज्यों में अपनाई गई मुफ्त सुविधाओं की संस्कृति आर्थिक विकास में बाधा डालती है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत समेत जजों ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा ज्यादातर राज्य पहले से ही घाटे में हैं, फिर भी विकास को छोड़कर मुफ्त सुविधाएं बांट रहे हैं। कोर्ट ने साफ कहा जो लोग भुगतान नहीं कर सकते, उन्हें सहायता देना समझ में आता है। लेकिन अमीर-गरीब में फर्क किए बिना सबको मुफ्त देना गलत नीति है। इस दौरान कोर्ट ने चेतावनी दी और कहा अगर सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, साइकिल और बिजली मिलती रही तो लोगों में काम करने की भावना कम हो जाएगी। मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘कई राज्य सरकारें भारी कर्ज और घाटे के बावजूद मुफ्त योजनाएं बांट रही हैं। अगर सरकारें मुफ्त पैसे, बिजली या दूसरी सुविधाएं देती रहेंगी, तो आखिर इनका खर्च कौन उठाएगा? अगर सरकारें मुफ्त खाना, साइकिल और बिजली जैसी सुविधाएं देती रहेंगी, तो विकास के कामों के लिए पैसा कहां से आएगा?’ सीजेआई ने कहा कि कई राज्य पहले से ही घाटे में हैं, फिर भी वे नई-नई कल्याण योजनाएं शुरू कर रहे हैं। कोर्ट ने कैश ट्रांसफर व मुफ्त सुविधाओं की घोषणा करने की वित्तीय समझदारी पर सवाल उठाया और कहा कि राज्यों को मदद बढ़ाने के बजाय रोजगार पैदा करने को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं कोर्ट ने राज्यों को सलाह दी कि मुफ्त चीजें बांटने के बजाय, रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान देना चाहिए। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पूछा, भारत में हम कैसी संस्कृति बना रहे हैं? क्या यह वोट पाने की नीति नहीं बन जाएगी? फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है। अब अगली सुनवाई में तय होगा कि ऐसे मुफ्त बिजली योजनाओं पर क्या नियम लागू होंगे। यह मामला इसलिए बड़ा है क्योंकि कई राज्यों में चुनाव से पहले मुफ्त योजनाएं घोषित होती हैं और इससे सरकारी खर्च बढ़ता है, जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दिया है कि गरीबों की मदद जरूरी है, लेकिन बिना सोच-समझ सबको मुफ्त सुविधाएं देना देश के विकास के लिए सही नहीं है।






Comments

अन्य खबरें

डीआरडीओ का ड्रैग पैराशूट का टेस्ट सफल रहा, प्रोजेक्ट गगनयान में एक और छलांग
डीआरडीओ का ड्रैग पैराशूट का टेस्ट सफल रहा, प्रोजेक्ट गगनयान में एक और छलांग

नयी दिल्ली/ चंडीगढ़.... रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने बुधवार को चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशाला में 'ड्रैग पैराशूट' का लोड टेस्ट सफलतापूर्वक संपन्न किया। भारत के पहले मानव

बजट 2026-27 : विकसित भारत के लक्ष्य को प्राथमिकता, वित्त मंत्री बोलीं
बजट 2026-27 : विकसित भारत के लक्ष्य को प्राथमिकता, वित्त मंत्री बोलीं

नई दिल्ली ...वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026-27 को लेकर कई अहम बातें कही। उन्होंने कहा कि बार-बार बदलती नीतियों से पैदा होने वाली अनिश्चितता को खत्म करना ही इस बार के बजट की असली

गुरु रविदास की जयंती पर देशवासियों को शुभकामनाएं और बधाई दी मुर्मु ने
गुरु रविदास की जयंती पर देशवासियों को शुभकामनाएं और बधाई दी मुर्मु ने

नयी दिल्ली .... राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरु रविदास जी की जयंती की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं और बधाई दी हैं। श्रीमती मुर्मु ने शनिवार को अपने संदेश में कहा , " गुरु रविदास

ऐतिहासिक निचले स्तर से उबरा रुपया, 22 पैसे मजबूत
ऐतिहासिक निचले स्तर से उबरा रुपया, 22 पैसे मजबूत

मुंबई... अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर की तुलना में 22 पैसे मजूबत हुआ और कारोबार की समाप्ति पर एक डॉलर 91.68 रुपये का बोला गया। भारतीय मुद्रा पिछले कारोबारी दिवस पर