नयी दिल्ली .... इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने शुक्रवार को इन अटकलों को खारिज कर दिया कि भारत को ईरान पर हमलों के बारे में पहले से ही जानकारी थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनकी इजरायल यात्रा के दौरान इन हमलों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी थी क्योंकि हमलों का निर्णय बाद में लिया गया था। अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई श्री मोदी की इजरायल यात्रा के दो दिन बाद शुरू हो गयी थी। श्री मोदी ने यात्रा के दौरान इजरायली प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता की थी और उन्होंने इजरायल की संसद नेसेट को भी संबोधित किया था।
श्री सार ने यहां रायसीना डायलाग में वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लेते हुए कहा , " प्रधानमंत्री मोदी और भारत के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं और हमने अपने संबंधों को और गहरा किया है। 2026 के लिए भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने का एक व्यापक एजेंडा तैयार किया गया है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और साथ ही सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था भी है।"
उन्होंने कहा, "हम गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी को इस बारे में जानकारी नहीं दे सके क्योंकि इस कार्रवाई का निर्णय शनिवार तड़के ही लिया गया था।" उन्होंने बताया कि यह फैसला अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता के विफल होने के बाद लिया गया।
श्री सार ने कहा, "यह उसी गुरुवार को हुई अमेरिका और ईरान की वार्ता के असफल होने के बाद हुआ, इसलिए इस यात्रा के दौरान इसकी जानकारी देना संभव ही नहीं था।"
ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के क्षेत्रीय प्रभावों पर पूछे गए सवाल के जवाब में इज़राइली मंत्री ने कहा कि हिज्बुल्लाह ने "लेबनान की जनता और देश की इच्छा के विरुद्ध" इस युद्ध में प्रवेश किया है और यह निर्णय तेहरान के निर्देश पर लिया गया।
उन्होंने कहा कि हिज़्बुल्लाह अब इज़राइल के आबादी वाले क्षेत्रों, विशेषकर उत्तरी हिस्सों में, मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है। "वे हमारी आबादी वाले केंद्रों पर मिसाइल और ड्रोन दाग रहे हैं, मुख्यतः हमारे देश के उत्तरी भाग में, और यह स्पष्ट है कि यह एकतरफा नहीं रहेगा।"
श्री सार ने क्षेत्र में तनाव बढ़ाने के लिए तेहरान पर भी आरोप लगाया और कहा कि ईरान ने कई अन्य देशों को भी निशाना बनाया है। "ईरान बहुत ही अविवेकपूर्ण ढंग से व्यवहार कर रहा है। उन्होंने कहा," उसने कम से कम 10 देशों पर हमला किया है—सभी खाड़ी देश, साइप्रस, अजरबैजान और मेरा मानना है कि तुर्की भी। यह सामान्य व्यवहार नहीं है, क्योंकि यह शासन सामान्य नहीं है। "
यह सैन्य कार्रवाई कितने दिन चलेगी इस पर उन्होंने कहा कि न तो इज़राइल और न ही अमेरिका ने इस अभियान के लिए कोई निश्चित समयसीमा तय की है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ईरान से उत्पन्न "दीर्घकालिक अस्तित्वगत खतरे" को समाप्त करना है।
क्षेत्रीय प्रभावों के बारे में उन्होंने कहा कि यदि ईरान में नेतृत्व परिवर्तन होता है तो इससे पूरे पश्चिम एशिया की भू-राजनीति बदल सकती है। उन्होंने कहा,"1970 के दशक के अंत में हुई ईरान की क्रांति के बाद से क्षेत्र में कई चीजें बदतर हुई हैं। "
सैन्य कार्रवाई के अंतिम परिणाम के बारे में पूछे जाने पर श्री सार ने कहा कि ईरान में शासन परिवर्तन अंततः वहां के लोगों पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा, "शासन परिवर्तन ईरान की जनता द्वारा ही होगा। अंततः इस कहानी का अंत ईरानी लोग ही लिखेंगे।"