नयी दिल्ली.... दिल्ली पुलिस ने आईलाइव कनेक्ट के साथ मिलकर शनिवार को शास्त्री पार्क के आईटी पार्क में हृदय रोग के प्रति जागरूकता बढ़ने को लेकर शिविर का आयोजन किया।
शिविर का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को लंबे समय तक काम करने और ज़्यादा तनाव वाले काम के कारण होने वाले हृदय रोग के बढ़ते जोखिम के प्रति जागरूक करना और पुलिस बल के भीतर हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देना था। शिविर में हृदय स्वास्थ्य की जांच, हृदय रोगों पर जागरूकता सत्र, बचाव के उपायों पर चर्चा और आधुनिक चिकित्सा तकनीक के प्रदर्शन शामिल थे।
पुलिस ने बताया, "30 से ज़्यादा पुलिसकर्मियों ने स्वास्थ्य जांच में हिस्सा लिया।" इस कार्यक्रम में संयुक्त पुलिस आयुक्त मिलिंद महादेव, उप पुलिस आयुक्त (मेट्रो एवं रेलवे) भरत रेड्डी और आईलाइव कनेक्ट के संस्थापक तथा हृदय एवं फेफड़ों के रोगों का संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राहुल चंडोला शामिल हुए। डॉ. चंडोला वरिष्ठ हृदयरोग विशेषज्ञ और वैस्कुलर सर्जन हैं। उन्होंने हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए नियमित व्यायाम, सही खान-पान और पर्याप्त नींद के महत्व पर ज़ोर दिया। कार्यक्रम में बोलते हुए श्री महादेव ने कहा, "अगर हम अपने दिल का ख्याल रखेंगे, तो वह हमारा ख्याल रखेगा। जीवन में संतुलन बनाए रखना बहुत ज़रूरी है। रोज़मर्रा की भागदौड़ के बीच, हमें अपने लिए भी समय निकालना चाहिए।"
वहीं, श्री रेडी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कोविड के बाद हृदय संबंधी मामलों में बढ़ोतरी देखी गयी है, यहाँ तक कि पुलिसकर्मियों में भी, और उन्होंने दिल के दौरे से बचाव में जीवनशैली में बदलाव की भूमिका पर प्रकाश डाला।
डॉ. चंडोला ने आगाह किया कि हृदय रोग अक्सर चुपचाप बढ़ते हैं, और लगभग 50 प्रतिशत दिल के दौरे बिना किसी पहले के लक्षण के पड़ते हैं।
उन्होंने हर हफ़्ते कम से कम 150 मिनट व्यायाम करने, नमक और पहले से बना हुआ खाद्य पदार्थ सेवन कम करने, और रोज़ाना लगभग 7.5 घंटे की नींद लेने की सलाह दी। उन्होंने रूटीन चेक-अप की सीमाओं के बारे में भी बताया और समझाया कि आईलाइव कनेक्ट के वियरेबल डिवाइस के ज़रिए लगातार निगरानी करने से दिल की सेहत का ज़्यादा सटीक आकलन कैसे किया जा सकता है। इस प्रोग्राम के दौरान, कई अधिकारियों को आईलाइव कनेक्ट के बायो-सेंसर पैच और वेलनेस ब्रेसलेट दिए गए।
डॉ. चंदोडा ने कहा, "ये उपकरण दिल की धड़कन और रक्त चाप का सही समय पर निकरानी करते हैं। इनका डेटा 24×7 एक रिमोट कमांड सेंटर में बैठे डॉक्टर ट्रैक करते हैं, और अगर कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो वे मरीज़ों और उनके परिवारों को सतर्क करते हैं।" उन्होंने बताया कि इसमें हिस्सा लेने वाले कर्मचारियों की सात दिनों तक निगरानी की जाएगी, जिसके बाद उन्हें सेहत की पूरी रिपोर्ट दी जाएगी।