नयी दिल्ली .... केंद्र सरकार ने वैश्विक सीफूड बाजार में पैठ बढ़ाने के लिए निर्यात विविधीकरण और गुणवत्ता मानकों को अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप बनाने की दिशा में सक्रिय प्रयास शुरू किए हैं।
शुक्रवार को जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत सरकार चुनिंदा वस्तुओं पर निर्भरता कम करने और उत्पाद पोर्टफोलियो का विस्तार करने के लिए उच्च मूल्य वाली प्रजातियों जैसे टूना, सीबास, मड क्रैब और टाइगर श्रिंप की जलीय कृषि को बढ़ावा दे रही है।
निर्यात श्रृंखला को मजबूत करने के लिए मत्स्य विभाग मछली बीज उत्पादन, आधुनिक मत्स्य बंदरगाहों के निर्माण और निर्बाध शीत श्रृंखला नेटवर्क (कोल्ड चेन) जैसे बुनियादी ढांचे में निवेश कर रहा है। सरकार का मुख्य ध्यान अमेरिकी बाजार की कठिन अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करने पर है। इन प्रयासों के चलते देश को साल 2025 में अमेरिकी अधिकारियों से समर्थन मिला जिससे दिसंबर 2025 की समय सीमा के बाद भी भारतीय सीफूड का अमेरिकी बाजार में निर्यात निरंतर बना रहना सुनिश्चित हुआ।
व्यापार सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को बढ़ावा देने के लिए नियामक प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। सैनिटरी इम्पोर्ट परमिट (एसआईपी) प्रणाली को राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम के साथ जोड़ने की इजाजत का वक्त 30 दिन से घटकर मात्र 72 घंटे रह गया है। इसके अलावा, मूल्य संवर्धन और दोबारा निर्यात के लिए लाई गई मछली तथा अनुसंधान नमूनों के आयात पर एसआईपी आवश्यकताओं से छूट दी गई है, जिससे व्यापारिक संचालन सरल हुआ है।
आगामी पांच वर्षों के लिए सरकार ने उच्च मूल्य वाले निर्यात और व्यापक बाजार पहुंच सुनिश्चित करने की रणनीति तैयार की है। इस योजना के तहत प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार और कुशल कार्यबल के माध्यम से मूल्य वर्धित उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाई जाएगी।
सरकार का लक्ष्य ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, आसियान और पश्चिम एशिया जैसे प्रमुख बाजारों में भारत की उपस्थिति को मजबूत करना है। डिजिटल ट्रेसबिलिटी और उन्नत शीत श्रृंखला नेटवर्क के माध्यम से भारत को वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद और प्रीमियम सीफूड निर्यातक के रूप में स्थापित करने की तैयारी की जा रही है।