नई दिल्ली ... किसानों के हितों की रक्षा और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाए रखना मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट मानना है कि किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध कराने में कोई कमी नहीं आनी चाहिए, इसलिए जरूरत पड़ने पर सरकार इसके लिए खजाना खोलने से भी पीछे नहीं हटती। हम आपको बता दें कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर खाद की आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बढ़ा है, लेकिन केंद्र सरकार ने समय रहते कई महत्वपूर्ण कदम उठाकर यह सुनिश्चित करने की तैयारी शुरू कर दी है कि खरीफ और रबी मौसम में किसानों को खाद की कमी का सामना न करना पड़े। वैकल्पिक परिवहन मार्गों की तलाश, अतिरिक्त आयात, बढ़ती सब्सिडी का बोझ उठाने की तैयारी और सक्रिय कूटनीतिक प्रयास इस बात का प्रमाण हैं कि किसानों की जरूरतों को पूरा करना सरकार की सबसे बड़ी चिंता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद भारत आने वाले खाद से लदे 17 जहाज फारस की खाड़ी क्षेत्र में फंस गए हैं। इन जहाजों के अटकने से देश में खाद आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक वैकल्पिक योजना पर काम शुरू किया है। इसके तहत संबंधित बंदरगाहों पर जहाजों के पहुंचने के बाद खाद को सड़क मार्ग से लगभग 1200 किलोमीटर दूर सऊदी अरब के यनबू बंदरगाह तक पहुंचाया जाएगा। वहां से इसे फिर समुद्री मार्ग के जरिए भारतीय बंदरगाहों तक लाने की योजना बनाई जा रही है। यद्यपि यह मार्ग लंबा है और इसमें अधिक समय लगेगा, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसे सबसे व्यवहारिक विकल्प माना जा रहा है।सूत्रों के अनुसार खाद विभाग ने मंत्रियों के एक अनौपचारिक समूह को इस योजना की जानकारी दी है। अधिकारियों का मानना है कि जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित होने के कारण सीधे मार्ग से आपूर्ति फिलहाल संभव नहीं है। देरी के कारण 60 से 70 दिनों तक अतिरिक्त समय लग सकता है, जिससे लागत भी बढ़ेगी। हालांकि सरकार का मानना है कि खरीफ मौसम के दौरान किसानों को खाद की उपलब्धता बनाए रखने के लिए यह अतिरिक्त प्रयास जरूरी है। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर रबी फसलों की बुआई पर भी पड़ सकता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए भारत ने खाद आयात की दिशा में भी बड़े कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार ने 17 लाख टन यूरिया के आयात के लिए नया वैश्विक निविदा आमंत्रित किया है। सरकारी क्षेत्र की राष्ट्रीय उर्वरक लिमिटेड ने पश्चिमी और पूर्वी तटों के लिए अलग-अलग मात्रा में आयात प्रस्ताव मांगे हैं। इन खेपों को जुलाई के तीसरे सप्ताह तक रवाना करने की योजना बनाई गई है, ताकि धान, मक्का और सोयाबीन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुआई से पहले पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया जा सके। रिपोर्टों के मुताबिक, घरेलू उत्पादन को बनाए रखने के लिए भी सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। खाद कारखानों को मिलने वाली गैस की आपूर्ति को पहले के लगभग 70 से 75 प्रतिशत स्तर से बढ़ाकर करीब 90 प्रतिशत तक कर दिया गया है।