नई दिल्ली ..... पश्चिम एशिया और अफ्रीका में तेजी से बदलते हालात के बीच भारत, पाकिस्तान और सऊदी अरब की रणनीतिक गतिविधियां एक दूसरे से जुड़ी हुई दिखाई दे रही हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का सऊदी अरब दौरा और पाकिस्तान द्वारा सूडान को हथियार आपूर्ति के बड़े समझौते को रोकना, दोनों घटनाएं क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में हो रहे बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं। हम आपको बता दें कि पाकिस्तान ने सूडान को हथियार और लड़ाकू विमान देने से जुड़े लगभग डेढ़ अरब डॉलर के समझौते को फिलहाल स्थगित कर दिया है। यह फैसला तब लिया गया जब सऊदी अरब ने इस समझौते के वित्त पोषण से हाथ खींच लिया और पाकिस्तान को इसे समाप्त करने का संकेत दिया। बताया जाता है कि यह सौदा अपने अंतिम चरण में था और इसकी मध्यस्थता भी सऊदी अरब ने ही की थी, लेकिन बाद में उसने अपनी रणनीति बदल दी। पाकिस्तान के लिए यह घटनाक्रम एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह अपने रक्षा निर्यात को विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ रहा था। हम आपको बता दें कि सूडान में पिछले तीन वर्षों से सेना और अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्स के बीच संघर्ष जारी है, जिसने गंभीर मानवीय संकट को जन्म दिया है। यह संघर्ष अब केवल आंतरिक नहीं रहा, बल्कि इसमें बाहरी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा भी शामिल हो गई है। लाल सागर के किनारे स्थित और सोने के बड़े उत्पादक देश के रूप में सूडान का सामरिक महत्व काफी अधिक है। इस पूरे घटनाक्रम में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। वहां दोनों देश अलग अलग पक्षों के साथ जुड़े हुए माने जाते हैं। जहां सऊदी अरब सूडान की सेना के करीब है, वहीं अमीरात पर रैपिड सपोर्ट फोर्स को रसद सहायता देने के आरोप लगे हैं, हालांकि वह इन्हें खारिज करता रहा है। ऐसे में सऊदी अरब का इस सौदे से पीछे हटना यह संकेत देता है कि वह अफ्रीका में प्रत्यक्ष या परोक्ष संघर्षों से दूरी बनाना चाहता है।