नई दिल्ली .... नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में मोदी सरकार ने ऐसा दांव चला है, जिसने दलों की दीवारों को भी काफी हद तक तोड़ दिया है। खास तौर पर विपक्षी दलों से महिला नेताओं ने सरकार के इस कदम का खुलकर समर्थन किया है। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने जहां इस अधिनियम को ऐतिहासिक बताया है, वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने भी सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। हालांकि, बसपा प्रमुख ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को दिए जा रहे 33 प्रतिशत आरक्षण में एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं का अलग से कोटा रखने की मांग भी की है। गुरुवार से शुरू हुए संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक लाया जा रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के दौरान ही देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं प्रतिभा पाटिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सरकार के इस निर्णय का समर्थन और स्वागत किया है। उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को ऐतिहासिक बताने के साथ ही लिखा कि यह संविधान संशोधन ऐसा परिवर्तनकारी कदम है, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करेगा और विधायी संस्थाओं में महिलाओं का मजबूत प्रतिनिधित्व व भागीदारी सुनिश्चित करेगा। इसी तरह बसपा प्रमुख व उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा है कि उनकी पार्टी हमेशा को महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण की समर्थक रही है, लेकिन वह 33 प्रतिशत आरक्षण का भी स्वागत करती हैं। इस निर्णय को देरी से लिया गया निर्णय बताते हुए कहा कि इसके बावजूद वह इसका स्वागत करती हैं। हालांकि, साथ में मायावती ने 33 प्रतिशत आरक्षण में एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं का अलग से कोटा तय करने की भी मांग की है।