नई दिल्ली ..... रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ‘ऑल इंडिया ट्रैक मेंटेनर्स कॉन्फ्रेंस’ में भारतीय रेलवे के भविष्य को लेकर कई बड़ी बातें कहीं। उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में रेल हादसों में करीब 90 फीसदी की कमी आई है। रेल मंत्री ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया, लेकिन साथ ही कहा कि हमें यहीं नहीं रुकना है। अब सरकार का लक्ष्य रेल हादसों की संख्या को घटाकर इकाई (सिंगल डिजिट) में लाना है। उन्होंने कहा सरकार का मुख्य उद्देश्य भारतीय रेलवे के सुरक्षा स्तर को विकसित देशों के बराबर पहुंचाना है। कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए रेल मंत्री ने पटरियों के आधुनिकीकरण को भी जरूरी बताया। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले दस वर्षों में लगभग 36000 किलोमीटर नई पटरियां बिछाई गई हैं। पटरियों की बेहतर देखरेख के लिए अभी रेलवे के पास करीब 1,800 ट्रैक मशीनें हैं। सरकार इन मशीनों की संख्या बढ़ाकर 3,000 करना चाहती है। जब मशीनों की संख्या 3,000 के करीब पहुंच जाएगी, तो पटरियों की जांच और मरम्मत से जुड़ी पुरानी समस्याएं काफी हद तक खत्म हो जाएंगी। रेलवे अब पटरियों की देखरेख के लिए ‘रेल-कम-रोड व्हीकल’ नाम का नया मॉडल ला रहा है। इस सिस्टम में कर्मचारी अपने सभी औजार और सामान सीधे गाड़ी में लोड कर सकेंगे। सीधे ट्रैक पर जा सकेंगे और आराम से बैठकर पटरियों की जांच कर सकेंगे। इसका पायलट प्रोजेक्ट भावनगर डिवीजन में शुरू किया जा रहा है। वहां कड़ी टेस्टिंग के बाद दो ‘रेल-कम-रोड व्हीकल’ तैनात किए गए हैं। यह नया तरीका पुराने और कठिन काम करने के ढंग को पूरी तरह बदल देगा। इससे काम करना ज्यादा सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक होगा। इसके अलावा, पटरियों की जांच में ड्रोन तकनीक और नए तरह के गेज की मदद ली जा रही है। इन नए गेज से पटरियों के मोड़ और क्रॉसिंग की सटीक माप ली जा सकेगी। पहले जो काम अंदाजे से होते थे, अब वे पूरी सटीकता से होंगे। देश भर में अब आधुनिक ट्रैक सिस्टम लगाए जा रहे हैं।