अहमदाबाद.... प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को यहां कहा कि 2014 की तुलना में मोबाइल फोन उत्पादन में 2,700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
श्री मोदी ने अहमदाबाद जिले के हांसलपुर में सुजुकी की “ई-विटारा” इलेक्ट्रिक कार के अनावरण अवसर पर कहा कि अकेले इसी दशक में, भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में लगभग 500 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और पिछले एक दशक में रक्षा उत्पादन में भी 200 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां एक ओर दुनिया आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों का सामना कर रही है, वहीं पिछले एक दशक में भारत के नीतिगत निर्णय अत्यंत प्रभावी साबित हुए हैं। राष्ट्र की सेवा का अवसर मिलने के बाद 2014 में इस परिवर्तन की तैयारी शुरू होने का स्मरण करते हुए, उन्होंने मेक इन इंडिया अभियान की शुरुआत और वैश्विक तथा घरेलू, दोनों ही निर्माताओं के लिए अनुकूल वातावरण के निर्माण पर प्रकाश डाला और कहा कि भारत अपने विनिर्माण क्षेत्र को कुशल और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए काम कर रहा है। इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए देश भर में औद्योगिक गलियारे विकसित किये जा रहे हैं और प्लग-एंड-प्ले अवसंरचना तथा लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित किये जा रहे हैं तथा कई क्षेत्रों के निर्माताओं को विनिर्माण-संबद्ध प्रोत्साहन योजना के तहत लाभ दिये जा रहे हैं।
श्री मोदी ने कहा कि निवेशकों के सामने लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान बड़े सुधारों के माध्यम से किया गया है, इन सुधारों ने निवेशकों के लिए भारतीय विनिर्माण में निवेश करना आसान बना दिया है। उन्होंने इन प्रयासों के ठोस परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अकेले इसी दशक में, भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में लगभग 500 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 की तुलना में मोबाइल फोन उत्पादन में 2,700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में रक्षा उत्पादन में भी 200 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। यह सफलता भारत के सभी राज्यों को प्रेरित कर रही है और इसने सुधारों और निवेश के लिए राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को जन्म दिया है, जिसका लाभ पूरे देश को मिल रहा है। उन्होंने राज्यों से वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए व्यापार सुगमता बढ़ाने वाली विकासात्मक नीतियों और सुधारों को आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, “ भारत यहीं नहीं रुकेगा, हमारा लक्ष्य उन क्षेत्रों में और अधिक उत्कृष्टता प्राप्त करना है, जहां भारत ने अच्छा प्रदर्शन किया है।” सरकार इस प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए मिशन मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता दे रही है। भारत का ध्यान अब भविष्य के उद्योगों पर केंद्रित होगा। देश भर में छह संयंत्रों की स्थापना के साथ सेमीकंडक्टर क्षेत्र की प्रगति के बारे में उन्होंने भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को और बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
श्री मोदी ने कहा कि केन्द्र सरकार दुर्लभ खनिजों की कमी के कारण ऑटो उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियों के प्रति भी सचेत है। इस क्षेत्र में राष्ट्रीय क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए, उन्होंने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन की शुरुआत का ज़िक्र किया। इस मिशन के तहत, महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान के लिए भारत के विभिन्न स्थानों पर 1,200 से ज़्यादा अन्वेषण अभियान चलाये जायेंगे।
प्रधानमंत्री ने अगले हफ़्ते जापान की होने वाली अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और जापान के बीच संबंध राजद्वारी संबंधों से कहीं आगे तक फैले हैं। ये सांस्कृतिक और आपसी विश्वास पर आधारित हैं। दोनों देश एक-दूसरे के विकास में अपनी प्रगति देखते हैं।
मारुति सुज़ुकी से शुरू हुआ सफ़र अब बुलेट ट्रेन की रफ़्तार तक पहुंच गया है, इस बात का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत-जापान साझेदारी की औद्योगिक क्षमता को साकार करने की मुख्य पहल गुजरात में शुरू हुई थी। अतीत को याद करते हुए, उन्होंने कहा कि 20 साल पहले जब वाइब्रेंट गुजरात समिट की शुरुआत हुई थी, तब जापान एक प्रमुख साझेदार था। उन्होंने गुजरात के लोगों द्वारा अपने जापानी समकक्षों के प्रति दिखाये गये स्नेह की सराहना की।
उन्होंने बताया कि उद्योग से जुड़े नियम और क़ानून आसानी से समझ में आने के लिए जापानी भाषा में छपवाये गये थे और जापानी मेहमानों की सुविधा के लिए जापानी भोजन की व्यवस्था की गयी थी। उन्होंने जापानियों के गोल्फ प्रेम की सराहना की और कहा कि उनके हितों को ध्यान में रखते हुए 7-8 नए गोल्फ कोर्स विकसित किये गये हैं और भारत के कॉलेज और विश्वविद्यालय अब जापानी भाषा शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
श्री मोदी ने कहा, "भारत के निरंतर प्रयास भारत और जापान के बीच लोगों के बीच संपर्क को मज़बूत कर रहे हैं। दोनों देश अब कौशल विकास और मानव संसाधन के क्षेत्र में एक-दूसरे की ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं।" उन्होंने मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों से ऐसी पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेने और युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का आग्रह किया। आने वाले वर्षों में सभी प्रमुख क्षेत्रों में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज के प्रयास 2047 तक एक विकसित भारत की नींव को मज़बूत करेंगे। उन्होंने कहा कि जापान इस लक्ष्य को प्राप्त करने में एक विश्वसनीय भागीदार होगा।
इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, भारत में जापानी राजदूत, ओनो केइची, सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।