- संविदा लाइनमैन समेत चार ग्रामीण झुलसे, प्राइवेट अस्पताल में चल रहा इलाज
- बिना पीआर कोड नम्बर के लगाया गया ट्रांसफार्मर दस मिनट में ही बोला धड़ाम
- अपनी गर्दन बचाने के लिए जेई ने दिलदारनगर थाने में दर्ज कराया मुकदमा
- झुलसे लाइनमैन ने दिया बयान! जेई के दबाव में आकर उसने लगाया था ट्रांसफार्मर
गाजीपुर। विद्युत वितरण खण्ड चतुर्थ जमानिया के अंतर्गत उपकेंद्र भदौरा के उसिया फीडर के ग्राम उसिया में एक निजी आइस फैक्ट्री का अवैध तरीके से लगाया गया 25 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाने के दस मिनट बाद ही तेज धमाके के साथ आग को गोला बन गया। हादसे में मौके पर मौजूद एक लाइनमैन समेत चर ग्रामीण गम्भीर रुप से झुलस गये। झुलसे हुए लोगों को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया। हादसे के पीछे जेई व ठेकेदार की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। हालांकि इस मामले में जेई ने दिलदारनगर थाने में इस आशय का मुकदमा दर्ज कराया है कि बिना मेरे संज्ञान में दिये हुए चोरी-छिपे ट्रांसफार्मर लगाया गया था। जबकि क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि जेई की सहमति से ही ट्रांसफार्मर लगाया गया था। हादसे को लेकर बिजली विभाग के सभी अधिकारी सकते में आ गये है। अभी करीमुद्धीनपुर क्षेत्र के उतरांव फीडर पर करंट लगने से लाइनमैन की हुई मौत का मामला ठंडा भी नहीं हुआ कि यह दूसरा बड़ा बवाल विभाग के अधिकारियों के सामने आ गया है। चर्चा है कि जेई अपनी गर्दन बचाने के लिए अपने कर्मचारियों पर आरोप का ठीकरा फोड़ रहे है।
ट्रांसफार्मर लगा दो वरना कर दिये जाओंगे बर्खास्त
हादसे में झुलसे संविदा पर कार्यरत लाइनमैन मंटू ने बताया कि मुझे पिछले दस दिनों से जेई एवं ठेकेदार द्वारा बोला जा रहा था कि इस आइस फैक्ट्री वाले का ट्रांसफार्मर लगा दो नहीं तो नौकरी से बर्खास्त कर दिए जाआंेगे। तब मेरे द्वारा जेई को बोला गया था कि ट्रांसफार्मर का कोई पीआर नंबर नहीं है फिर भी जेई द्वारा मुझ पर दबाव दिया गया तब जाकर हमलोग ट्रांसफार्मर को चढ़ाए और चार्ज करने के दौरान अचानक ही ट्रांसफार्मर ब्लास्ट हो गया। जिसमें मेरा हाथ झुलस गया और चार ग्रामीण बुरी तरह झुलस गए हैं। सभी का उपचार आइसलैंड हॉस्पिटल दिलदारनगर किया जा रहा है।
चहेते ठेकेदार को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहे है जेई
उपकेंद्र भदौरा के अवर अभियंता शशिकांत पटेल अपनी कारस्तानियों को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। अभी कुछ माह पहले एक ठेकेदार के घर से 22 ट्रांसफार्मर अवैध तरीके पुलिस द्वारा पकड़ा गया था, जिसमे इस अवर अभियंता की भूमिका संदिग्ध रही थी, वही उसी क्षेत्र के एक ठेकेदार सद्दाम खान है जिसके साथ अवर अभियंता का पिछले पांच वर्षो से है। ग्रामीणों के अनुसार उक्त ठेकेदार के इशारे पर क्षेत्र में सभी अवैध कार्य होते है। क्षेत्र के तमाम जगह गलत लाइन चार्ट बनाकर अवैध तरीकों से ट्रांसफार्मर लगाने का खेल इन लोगो बहुत दिनों से चल रहा है।
आखिरकार लाइनमैन को क्यो नहीं मिला ‘पीआर’ नम्बर
बिना कंप्लेन किए एवं बिना पीआर नंबर के ही कैसे आइस फैक्ट्री में ट्रांसफार्मर लगा दिया गया था यह सवाल सभी के जेहन में कौंध रहा है। जानकारी के लिए बता दे कि पीआर कोड नम्बर सम्बंधित इलाके के जेई द्वारा जारी किया जाता है ताकि बिजली का कोई भी उपकरण कही लगे तो उसका पूरा रिकार्ड विभाग के पास मौजूद रहे। यहा तो ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। एक तरफ जहां हादसे का शिकार हुआ संविदा लाइनमैन जेई द्वारा दबाव बनवाकर ट्रांसफार्मर लगाये जाने का आरोप लगा रहा है वहीं दूसरी ओर जेई इस आशय का मुकदमा दर्ज करा रहे है कि ट्रांसफार्मर लगाये जाने की बात उनके संज्ञान में ही नहीं दी गई।
इनसेट
जेई साहब शायद यह बात भूल रहे है कि ट्रांसफार्मर कोई बिजली का तार नहीं है जिसे चोरी छिपे लगा दिया जाये। विभाग के गोदाम में कितने ट्रांसफार्मर है और उन्हें कहां-कहां लगाया जाना है यह सब बाते ऑन रिकार्ड होती है। तार की छोटी मोटी चोरी होती तो सभी समझ जाते है कि इसमें लाइनमैन ने हाथ की सफाई दिखाई है, लेकिन ट्रांसफार्मर को कोई कैसे भला चोरी से लगा सकता है यह बात किसी के गले के नीचे से नहीं उतर रही है। जेई साहब लाख सफाई दे, लेकिन इस मामले में यदि सही ढंग से जांच हो जाये तो गलती किसकी है इसका खुलासा चुटकी बजाते हो जायेगा।
वर्जन
मामला मेरे ही नहीं बल्कि उच्चाधिकारियों के संज्ञान में भी पहुंच गया है। मेरे स्तर से मामले की जांच कराई जा रही है। सम्बंधित जेई ने इस मामले में दिलदारनगर थाने में मुकदमा भी दर्ज करा दिया है। इसमें गलती किसकी है यह पता लगाने के लिए प्राथमिक जांच बहुत जरुरी है। इसके लिए जमानियां एक्सईएन को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिया गया है। बृजेश कुमार- प्रभारी अधीक्षण अभियंता