- छापेमारी के नाम पर बनाता है वीडियो फिर शुरु होता है डिलिट करने का खेल
- विद्युत वितरण खंड प्रथम के एक संविदाकर्मी के पास ‘ब्लैक मनी’ का होता है कलेक्शन
- काम के हिसाब से होता है ब्लैक मनी का बंटवारा, सेटलमेंट बाबू होता है शीर्ष हिस्सेदार
गाजीपुर। बिजली चोरी में एफआईआर का नाम सुनकर किसी का भी कलेजा कांप उठेगा, लेकिन क्या आप जानते है कि इस धौंस पर विभाग द्वारा गठित टीम क्या-क्या गुल खिलाती है। आइये आप को बताए! टीम क्षेत्र में बिजली चोरी करने वाले लोगों को पकड़ने जाती है तो इसके पीछे भी उनके ही विभाग के जुड़े मुखबिर होते है जो यह बताते है कि अमुक जगह अमुक व्यक्ति द्वारा चोरी से बिजली का उपयोग किया जा रहा है। फिर क्या टीम की बल्ले-बल्ले हो जाती है। टीम के लोग वहां पहुंचते है और छापा मारते है। टीम में शामिल खाकीवर्दी के लोग जेई साहब की अगुवाई में पहुंचते है और बाईपास या फिर अन्य तरीके से बिजली चोरी को पकड़ते है। फिर वाकायदे मौके की वीडियो बनाई जाती है। टीम का काम यही नहीं खत्म होता है वह लोग उपभोक्ता को बताते है कि अब उनके ऊपर मुकदमा दर्ज होगा और एक से दो लाख रुपये जुर्माना वसूला जायेगा। फिर क्या बेचारा उपभोक्ता अपनी गलती की माफी मांगता है और गिड़गिड़ाते हुए कहता है कि साहब ‘कुछ ले देकर मामला रफादफा कर दिजिए’। अब सम्बंधित जेई साहब को खुली आंखों से ‘धनलक्ष्मी’ के आने का सपना देखने लगते है और फिर उपभोक्ता को विद्युत वितरण खंड प्रथम में शाम के वक्त पांच बजे से पहले बुलाया जाता है। यहा आने के बाद जब पीड़ित जेई साहब को फोन करता है तो वह कहते है कि पचास हजार रुपये ऑफिस में कम्प्यूटर पर बैठे मेरे एक संविदकर्मी को दे देना। गिड़गिड़ाने के बाद मामला 30 हजार रुपये पर सेटलमेंट हो जाता है। फिर इसके बाद शुरु होता है ‘ब्लैक मनी’ के बंटवारे का खेल। बंटवारे में कई लोगों का हिस्सेदारी होती है जिसमें विद्युत वितरण खंड नगर का भी एक ‘बड़का बाबू’ शामिल है जिसे विभाग के लोग ‘सेटलमेंट बाबू’ के नाम से जानते है। करीब एक सप्ताह पूर्व टीम के लोगों ने भांवरकोल ब्लाक के शेरपुर समेत कई अन्य गांवों में छापा मारा था। वहां सभी जगहों पर बिजली चोरी का मामला पाया गया, लेकिन बाद में एक-दो को छोड़कर सभी की वीडियो डिलिट करने के बाद सेटलमेंट कर लिया गया। सभी ने उसी दिन शाम को आकर विद्युत वितरण खंड प्रथम के संविदाकर्मी के यहां वसूली का लिफाफा थमा दिया और एफआईआर की जद से बच निकले। इस समय तो होली आने वाली है और छापेमारी टीम से जुड़े सभी लोगों की बल्ले-बल्ले है। खासतौर से सेटलमेंट बाबू और सम्बंधित जेई की।
वसूली के खेल में अफसर फेल, सेटलमेंट बाबू पास
बहुत बड़ी बिडम्बना है कि चर्चित ‘सेटलमेंट बाबू’ का नाम जब बिजली विभाग के किसी अधिकारी के सामने आता है तो वह चुप्पी साध लेता है। इससे साफ जाहिर हो जाता है कि विभाग के जिम्मेदार ही ‘सेटलमेंट बाबू’ के असली रक्षक है। यदि ऐसा नहीं होता तो कब का उसे उसकी कुर्सी से हटा दिया गया रहता। ऐसे में तो यही कहा जा सकता है कि वसूली के खेल में अफसर फेल, सेटलमेंट बाबू पास हो गया।
वर्जन
मेरे संज्ञान में मामला है, लेकिन किया भी क्या जा सकता है। जब तक कोई पीड़ित आकर लिखित रुप से शिकायत नहीं करेगा तब तक मैं कैसे कार्रवाई करुंगा। फिलहाल इस मामले को मैं अपने स्तर से हैडिंल करुंगा। देखता हूं कि इसमें क्या सच्चाई है। बृजेश कुमार- प्र्रभारी अधीक्षण अभियंता