- शासन के निर्देश पर जल्द ही इनका होगा जेल स्थानान्तरण, जेल प्रशासन ने कसी कमर
- कार्रवाई की भनक लगने से जेल के खुंखार बंदियों में मची खलबली, सकते में है सभी
- दो जेलकर्मी भी जांच के घेरे में फंसे, गोपनीय तरीके से बैकग्राउंड का किया जा रहा पता
गाजीपुर। ‘इलेक्ट्रनिक डिवाइस यूज इन जेल’ मामले में तीन विचाराधीन बंदियों व एक आजीवन कारावास की सजा पाने वाले कैदी पर शासन के निर्देश पर बहुत जल्द ही गाज गिरने वाली है। जेल सूत्रों के मुताबिक इन लोगों के खिलाफ जिले के प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने अपनी जांच रिपोर्ट जेल उचाधिकारियों समेत शासन के जिम्मेदार लोगों को भेज दिया है। सूत्रों की माने तो बहुत जल्द ही तीन बंदियों समेत एक आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे कैदी का जेल स्थानान्तरण कर दिया जायेगा। इसके लिए जेल प्रशासन ने भी लगभग कागजी कार्रवाई पूरी कर ली है। हालांकि इसकी भनक जेल के कई खुंखार बंदियों को लग गई है। ऐसे में जिला जेल में बंद कैदियों व बंदियों में हड़कम्प मचा हुआ है। हालांकि सभी बंदी करीब-करीब अंदाजा लगा चुके है कि स्थानान्तरण की लिस्ट में कौन-कौन शामिल है।
चर्चित प्रकरण पर एक नजर
फरवरी माह के अंत में जेल के अंदर एक युवक को धमकी भरा फोन किया गया था। उक्त युवक ने पुलिस अधिकारियों को तहरीर देकर बताया था कि फोरजरी के मामले में जेल में निरुद्ध बक्सूबाबा एकेडमी के संचालक विनोद गुप्ता ने उसे फोन पर धमकी दी थी। मामले को गम्भीरता से लेते हुए पुलिस अधिकारियों ने छानबीन शुरु कराई। जेल प्रशासन भी मामले की तह तक पहुंचने के लिए ऐड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया था। इस मामले में स्वाट व सर्विलांस टीम ने जंगीपुर थाना क्षेत्र के बिलाईच गांव निवासी पम्मी यादव नामक युवक को दबोचा। जिसने बताया कि जेल के अंदर उसने ही सिमकार्ड पहुंचाया था। उसने बताया कि एनडीपीएस के मामले में जेल में बंद उसके चचेरे भाई बजरंगी यादव ने सिमकार्ड मंगवाया था और उस सिम का प्रयोग बजरंगी व विनोद गुप्ता ने किया। हालांकि पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर बंदी विनोद गुप्ता के खिलाफ शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज हो गया।
जेल स्थानांतरण को लेकर मचा है हड़कम्प
सूत्रों के मुताबिक यह मामला शासन स्तर तक पहुंच गया था। इसमें एसआईबी, आईबी व एलआईयू ने भी जांच पड़ताल की थी। कई दिनों तक जेल के अंदर ‘सर्च ऑपरेशन’ भी चला, लेकिन वहा कोई इलेक्ट्रानिक डिवाइस बरामद नहीं हुआ। हालांकि सच्चाई तो यही है कि पीड़ित को जो फोन आया था वह जेल के अंदर से ही आया था, लेकिन मोबाइल की बरामदगी न होने से प्रशासन ने जांच की दिशा को डायवर्ट कर दिया। सूत्रों के मुताबिक शासन के निर्देश पर जेल प्रशासन ने चार चिन्ह्नित बंदियों के जेल स्थानान्तरण की तैयारी शुरु कर दी है। इसके लिए जरुरी कागजी कार्रवाई पूरी की जा रही है। बहुत जल्द ही जेल प्रशासन अपनी रिपोर्ट शासन तक पहुंचा देगा इसके बाद स्थानान्तरण की प्रक्रिया पूरी कर दी जायेगी। इस कार्रवाई को लेकर जेल के खुंखार बंदियों में खलबली मची हुई है।
जांच की आग में झुलस सकते है दो जेलकर्मी
सूत्रों की माने तो इस केस में जेल के दो कर्मचारी भी जांच के घेरे में आ चुके है। हालांकि अभी उन्हें यह पता नहीं है कि उनके पीछे जांच टीम लगी हुई है। सूत्रों के अनुसार जेल डीआईजी राकेश श्रीवास्तव के निर्देश पर जेल के कुछ जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारी गोपनीय तरीके से संदिग्ध कर्मियों का बैकग्राउंड समेत उनकी वर्तमान गतिविधियों पर नजर रखे हुए है।
वर्जन
शासन व प्रशासन स्तर का यह मामला है। हालांकि अभी मुझे ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट प्राप्त होते ही मैं तत्काल कार्रवाई करुंगा। हालांकि वर्तमान में गाजीपुर जेल पूरी तरह से शांत है। यदि रिपोर्ट प्राप्त होती है तो तत्काल उसका अनुपालन किया जायेगा। चूंकि मामला जेल से जुड़ा हुआ है इसलिए यहां के कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई है। कुछ को जांच के घेरे में रखा भी गया है। राकेश वर्मा- जेलर