गाजीपुर। आईएस (191) गैंग का ढाई लाख का इनामी कुख्यात शूटर अनुज कन्नौजिया के एनकाउंटर से मुख्तार अंसारी का समूचा गैंग दहल उठा है। हालांकि मुख्तार अंसारी की मौत के बाद से उसका गैंग लगभग पूरी तरह से निष्क्रिय हो गया था, अभी तक अनुज कन्नौजिया अपराध जगत में सक्रिय था। झारखंड प्रांत के जमशेदपुर टाटा में एसटीएफ लखनऊ और गोरखपुर व झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने कुख्यात इनामी अनुज कन्नौजिया को मुठभेड़ में मार गिराया है। ‘ऑपरेशन अनुज कन्नौजिया’ में गाजीपुर की क्राइम ब्रांच भी लगी हुई थी। सूत्रों के मुताबिक अनुज के खिलाफ गाजीपुर जिले के अलग-अलग थानों में कुल 5 आपराधिक मुकदमे दर्ज है। अपराध जगत में भूचाल मचाने वाले अनुज कन्नौजिया के बारे में गाजीपुर की क्राइम ब्रांच ने कई सुराग एकत्रित कर लिया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अनुज कभी ‘नार्मन फोन कॉलिंग’ पर किसी से बात नहीं करता था। वह एनड्रोएड मोबाइल जरुर यूज करता था, लेकिन सिर्फ और सिर्फ व्हाट्सएप कॉलिंग ही करता था।
सेफ जोन में जाकर ऐसे करता था व्हाट्सएप कॉलिंग
गाजीपुर जिले की क्राइम ब्रांच टीम जिस समय अनुज कन्नौजिया को दबोचने के लिए सक्रिय हुई उसी वक्त पता चला कि अनुज नार्मल मोबाइल कॉलिंग नहीं करता है बल्कि किसी को फोन करने या फोन रिसिव करने के लिए वह व्हाट्सएप कॉलिंग का प्रयोग करता है। सूत्रों के अनुज पहले एक एनड्रोएड मोबाइल खरीदता था और किसी दूसरे मोबाइल में सिमकार्ड लगाकर अपने मोबाइल में व्हाट्सएप डाउनलोड कर लेता था। इसके बाद वह सिमकार्ड को फेंक देता था। बिना सिमकार्ड लगने मोबाइल का वह यूज करता था, जिसमें सिर्फ व्हाट्सएप डाउनलोड रहता था।
फोन करने के लिए सेफ जोन में पहुंचता था अनुज कन्नौजिया
पुलिस सूत्रों के मुताबिक जब अनुज को किसी से फोन पर बात करनी रहती थी तो वह ऐसी जगह पर जाता था जो उसके आवास से करीब 30 से 40 किलोमीटर दूर स्थित हो। ऐसी जगह में रेलवे स्टेशन या फिर कोई बड़ी कम्पनी या फिर हैवी मॉल पर वह जाता था। ऐसी जगहों पर हमेशा वाईफाई लगा होता है और आसानी से उसका पासवर्ड भी पता चल जाता था। वहीं पर अनुज अपने मोबाइल से वाईफाई को कनेक्ट करता था और व्हाट्सएप पर कॉलिंग करता था। ऐसे में उसके लोकेशन को ट्रेस करना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन हो जाता था।
वाईफाई के आईपी नम्बर को ट्रेस करना था नामुमकिन
गाजीपुर क्राइम ब्रांच ने अनुज कन्नौजिया के बारे में इतना तो पता कर ही लिया था कि पुलिस ट्रेसिंग सिस्टम से बचने के वह हर प्रकार का हथकंडे अपनाता है। भीड़भाड़ वाली जगहों जैसे रेलवे स्टेशन खासतौर से कोलकाता रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद अनुज वहां स्टेशन के टिकट विंडो से प्लेटफार्म टिकट खरीदता था और पूरे इत्मीनान के साथ घंटों स्टेशन पर बैठकर वहां के वाईफाई से अपने शूटरों से व्हाट्सएप कॉलिंग पर बात करता था। चूंकि स्टेशन के वाईफाई से वहां मौजूद सैकड़ों लोग जुड़े रहते है। ऐसे में वह किस नम्बर पर बात कर रहा है यही ट्रेस कर पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि पूरी तरह से नामुमकिन हो जाता था।